UPCM के समक्ष नदियों में मत्स्य आखेट हेतु बनायी जा रही नीति का प्रस्तुतिकरण हुआ

उत्तर प्रदेश (28 दिसम्बर, 2018)।
UPCM के समक्ष लोक भवन में नदियों में मत्स्य आखेट हेतु पट्टे/ठेके के अधिकार दिए जाने के सम्बन्ध में बनायी जा रही नीति का प्रस्तुतिकरण हुआ।

UPCM ने इस अवसर पर कहा कि इस नीति का निर्धारण इस ढंग से किया जाए कि छोटे मत्स्य जीवियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि मत्स्य आखेट की आड़ में अन्य इन्डेन्जर्ड प्रजातियों की मछलियों के अलावा कछुआ, घड़ियाल, गैंजेटिक, डाॅलफिन, मगर एवं अन्य प्रतिबंधित जलीय वन्य जीवों का शिकार किसी भी हाल में न हो। उन्होंने मत्स्य आखेट के लिए जारी किए जा रहे पट्टों से होने वाली आय के कुछ हिस्से को मछुआ समुदाय के उत्थान के लिए उपयोग करने के भी निर्देश दिए।

UPCM ने कहा कि नीति को लागू करने से पहले इसके सभी पक्षों को भलीभांति जांच लिया जाए और इसमें किसी प्रकार की कोई कमी न रहने पाए। प्रस्तुतिकरण के दौरान UPCM को अधिकारियों द्वारा नदियों में मत्स्य आखेट हेतु इस नीति में उल्लिखित व्यवस्था के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके तहत मत्स्य आखेट क्षेत्रों के चिन्हांकन के लिए उत्तर प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्राधिकार में पड़ने वाली नदियों में मत्स्य आखेट हेतु सम्बन्धित जनपद के जिलाधिकारी द्वारा प्रत्येक तहसील में उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में तहसील स्तरीय मत्स्य आखेट समिति का गठन किया जाएगा, जिसका अध्यक्ष उपजिलाधिकारी, दो सदस्य जिसमें जिलाधिकारी द्वारा नामित खण्ड विकास अधिकारी तथा अधिशासी अभियन्ता सिंचाई द्वारा नामित सहायक अभियन्ता होंगे। इसके अलावा, सहायक निदेशक मत्स्य/जनपदीय मत्स्य अधिकारी सदस्य सचिव होंगे।

अधिकारियों द्वारा UPCM को अवगत कराया गया कि इस नीति के तहत मत्स्य आखेट क्षेत्रों में मत्स्य मात्रा का निर्धारण किया जाएगा। इसके अलावा, मत्स्य आखेट हेतु मत्स्यजीवी सहकारी समितियों की पात्रता का वरीयताकरण भी निर्धारित किया जाएगा। UPCM को मत्स्य आखेट क्षेत्र की नीलीमी की प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया। उन्हें पट्टे/नीलामी से प्राप्त धनराशि के वितरण के विषय में भी अवगत कराया गया। मत्स्य आखेट हेतु निर्धारित शर्तों के विषय में भी उन्हें विस्तार से जानकारी दी गई।

UPCM ने अधिकारियों को नीति के सभी पक्षों की जांच करते हुए इसे शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए।

बैठक में पशुधन एवं मत्स्य राज्य मंत्री जय प्रताप निषाद, राजस्व परिषद के अध्यक्ष प्रवीर कुमार, प्रमुख सचिव श्रम सुरेश चन्द्रा, प्रमुख सचिव सिंचाई टी. वेंकटेश सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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