अवैध निर्माणकर्ता के रुपयों के तले दबे हैं एलडीए के अभियंता से लेकर उपाध्यक्ष…कर देना मुकदमा

लखनऊ में अवैध निर्माण की मंडी को बढ़ावा देने में अधिकारियों की खूब मिलीभगत है. अब बेचारे लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी भी क्या कर सकते हैं जब उनको निर्माणकर्ता से मोटी रकम मिल जाती है? सवाल है कि लखनऊ में एलडीए के अभियंता से लेकर उपाध्यक्ष तक अवैध निर्माणकर्ता के रुपयों के तले दबे हैं जिसके कारण अधिकारी उनके निर्माण पर कोई कार्यवाही नहीं करते।
सच यही है जिसे कोई छुपा नहीं सकता। लेकिन एलडीए अधिकारी अभी किसी पत्रकार को लीगल नोटिस तो कभी फर्जी मुकदमों में फ़साकर अपनी पीठ रेगमाल से साफ़ कर लेते हैं.
अब बात यह है कि अगर अधिकारी अपने गिरिबान झांककर देंखे, तो खुद पता चल जायेगा कि वह कितने ईमानदार हैं या भ्रष्टाचारी? अब कुछ तो शर्म करो कि जितना भ्रस्टाचार पैसा कमाओगे तो क्या उसे अपने साथ ऊपर बांधकर ले जाओगे?
सोचने वाली बात है कि निर्माणकर्ता अगर पत्रकार को मुकदमा करने की धमकी देता है तो क्या वह दूध का धुला है? निर्माणकर्ता खुद को यह समझते है कि अगर उन्होंने अधिकारियों के सामने नोटों की बोटी दाल दी तो, अधिकारी उनका गुलाम हो गया. है यह बात सच है कि एलडीए में कुछ ऐसा ही है. और अन्य विभागों में भी थोड़ा बहुत चलता है लेकिन कुछ ईमानदार असफर इन बोटी डालने वालों को कुत्ते की तरह खदेड़ कर भगा देते हैं.
खास बात यह है लखनऊ मंडल में इतनी ईमानदार अफसर लखनऊ मंडलायुक्त रोशन जैकब के होते हुए भी एलडीए में ऐसा भ्रष्टचार अपनी चरम पर है. सोचनीय विषय है कि क्या मंडलायुक्त रोशन जैकब को इसकी भनक नहीं है.
खबर जिस भी अधिकारी को लाल मिर्च की तरह चुभ जाये, उसके खुला ऑफर है कि पीठ पीछे लीगल नोटिस और मुकदमा न करके, सामने आकर करें और हम ही उसकी भखिया उधेड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेगे ये वादा है…..








