दिशा इंटर कॉलेज बरेली पहुंचीं राज्यपाल, बच्चों को दी सही दिशा की सीख
बरेली में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा संदेश: पढ़ाई की उम्र में रिश्ते नहीं, भविष्य बनाओ

बरेली उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल दिशा इंटर कॉलेज बरेली पहुंचीं। यहां उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी… लेकिन सबसे ज्यादा फोकस बच्चों के भविष्य और उनकी सही दिशा पर किया
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि स्कूल में दोस्ती होना स्वाभाविक है… लेकिन जब यही दोस्ती कम उम्र में रिश्तों और शादी जैसे फैसलों तक पहुंच जाती है, तो यह खतरनाक हो जाता है। उन्होंने साफ कहा कि पढ़ाई की उम्र में बच्चों को सिर्फ अपने भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। अगर सच्चा प्रेम है, तो वह इंतजार करेगा — पहले पढ़ाई पूरी करें, अपने पैरों पर खड़े हों, फिर जीवन के फैसले लें।
राज्यपाल ने यह भी बताया कि उनके पास कई ऐसी बच्चियां आईं, जो कम उम्र में भटक गईं और एक गलती की वजह से आज परेशान हैं। हालांकि, उन्हें जनभवन में एडमिशन देकर नई राह दिखाई गई और आज वे बेहतर जीवन जी रही हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा और विकास की भी बात की। उन्होंने बताया कि दिशा इंटर कॉलेज को एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी ने गोद लिया हुआ है और उन्होंने यूनिवर्सिटी से अपील की कि कम से कम 4 से 5 गांवों को भी गोद लिया जाए, ताकि वहां के बच्चों का भविष्य सुधर सके।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में उन्होंने कई बड़ी पहल का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि टीबी के मरीजों को गोद लेने से लेकर महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग तक बड़े स्तर पर काम किया गया। गुजरात में चलाए गए अभियान में करीब डेढ़ करोड़ महिलाओं की जांच कराई गई और जिनमें बीमारी मिली, उनका इलाज भी कराया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत जैसी योजना की तर्ज पर गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 3 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में चल रही योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक करीब 3 लाख बच्चियों को HPV वैक्सीन लगाई जा चुकी है और अब 14 साल तक की बेटियों के लिए यह वैक्सीन पूरी तरह मुफ्त कर दी गई है। उन्होंने सभी स्कूलों से अपील की कि इस अभियान को तेजी से शुरू किया जाए।
उन्होंने हरदोई का उदाहरण देते हुए सुरक्षा कर्मियों की मेहनत की सराहना की और सुझाव दिया कि पुलिस लाइंस समेत हर जगह बच्चियों के लिए वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाए।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बताया कि झोपड़पट्टी के 407 बच्चों को जनभवन में एडमिशन दिलाया गया, जो आज पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने गुजरात के अनुभव साझा करते हुए कहा कि टॉयलेट की समस्या खत्म होने के बाद स्कूल ड्रॉपआउट लगभग शून्य हो गया।
अंत में फिर से उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को वही सबसे बड़ा संदेश दिया —
कि दोस्ती तक सब ठीक है, लेकिन कम उम्र में गलत फैसले जीवन को मुश्किल बना देते हैं। इसलिए पढ़ाई को प्राथमिकता दें, अपने सपनों को पूरा करें… और सही समय आने पर ही जीवन के बड़े फैसले लें।