पांडुलिपियों, दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर डिजिटल रूप देगी योगी सरकार

विरासत के संरक्षण के लिए चलाया जा रहा ज्ञान भारतम मिशन

जिला स्तर पर पांडुलिपियों को चिन्हित व संग्रहीत करने के लिए शासन से निर्देश जारी

मूल संग्रहकर्ता के पास ही रहेगा पांडुलिपि का अधिकार, डिजिटल प्रकाशन कर विश्व पटल पर प्रस्तुत करेगी सरकार

वर्तमान और भावी पीढ़यां विरासत पर गर्व की अनुभूति कर सकें, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने हमेशा प्रतिबद्धता जताई है। इसी क्रम में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अभियान ‘ज्ञान भारतम मिशन’ में प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर विश्व पटल पर डिजिटल रूप देने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में जिला स्तर पर पांडुलिपियों को चिन्हित व संग्रहीत करने के आदेश जारी किए हैं। इसके पर्यवेक्षण के लिए हर जिले में वहां के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

विरासत के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत हर जिले में उपलब्ध भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी पांडुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रंथों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है ताकि यह धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके। उत्तर प्रदेश के लिए यह अभियान और भी विशेष है क्योंकि उत्तर प्रदेश को प्राचीन ज्ञान दर्शन, साहित्य और संस्कृति की भूमि माना जाता है।

गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों, व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण का कार्य किया जाना है। पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण होने से यह ज्ञान भारतम पोर्टल के माध्यम से आमजन को आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी।

रखरखाव के अभाव में व्यक्तियों या संस्थाओं के पास उपलब्ध कई ग्रंथ नष्ट होने की कगार पर हैं। अब जिला स्तर पर इन ग्रंथों को चिन्हित करने और उनके संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला स्तर पर अभियान चलाकर पांडुलिपियों का संग्रह करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से संपर्क कर उन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा। इसमें हाथ से लिखे उन ग्रंथों को शामिल किया जाएगा जो 75 वर्ष से अधिक प्राचीन हों। जिला स्तर पर तैयार सूची संस्कृति विभाग के जरिये प्रदेश के राजकीय अभिलेखागार को प्रेषित की जाएगी। जहां उच्च गुणवत्ता की स्कैनिंग के बाद इसका डिजिटल रूप तैयार हो जाएगा। इस मिशन की विशेषता यह है कि इसमें पांडुलिपियां संबंधित संग्रहकर्ता संस्था या व्यक्ति के ही अधिकार में रहेंगी।

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