UPCM अयोध्या में शोध संस्थान और विकास कार्यों का निरीक्षण करेंगे

लखनऊ (06 जून, 2019)।
UPCM
शुक्रवार 07 जून, 2019 को जनपद अयोध्या का भ्रमण करेंगे। यह जानकारी देते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि अयोध्या भ्रमण के अवसर पर UPCM अयोध्या शोध संस्थान जाएंगे। वहां वे ‘हस्तशिल्प में राम संग्रहालय’, डाक विभाग की प्रदर्शनी, अयोध्या शोध संस्थान की पुस्तक प्रदर्शनी और दीपोत्सव की प्रदर्शनी आदि का अवलोकन करेंगे।

UPCM भारतीय डाक विभाग के कोदण्ड प्रतिमा पर विशेष कवर आवरण को जारी करेंगे। इसके अलावा, संस्थान की ‘कैरेबियन देशों की रामलीला यात्रा’, अयोध्या की पुरातात्विक रिपोर्ट, ‘थारुओं की कला एवं संस्कृति’ और ‘अवध की लोक चित्रकला’ पुस्तक का लोकार्पण करेंगे। मूर्तिकारों, चित्रकारों एवं साहित्यकारों का सम्मान करेंगे। ईराक एवं होण्डुरास के राजदूत द्वारा प्रेषित ‘राम की विश्व यात्रा’ सम्बन्धी अभिलेखों के फोल्डर इस अवसर पर उन्हें भेंट किए जाएंगे।

भ्रमण के अवसर पर UPCM अयोध्या के विकास कार्यों का निरीक्षण करेंगे। वे राम की पौड़ी, वहां निर्माणाधीन भजन स्थल, अयोध्या बस स्टेशन के निर्माण कार्य और गुप्तार घाट के सौन्दर्यीकरण कार्य की प्रगति की जानकारी प्राप्त करेंगे। धर्मार्थ कार्य विभाग द्वारा जनपद अयोध्या में भजन संध्या स्थल का निर्माण कराया जा रहा है। इसके लिए उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।

पर्यटन विभाग द्वारा केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन स्कीम के रामायण सर्किट के अन्तर्गत विभिन्न परियोजनाओं को क्रियान्वित कराया जा रहा है। इनमें अयोध्या में बस डिपो का निर्माण कार्य सम्मिलित है। यह बस डिपो साकेत पेट्रोल पम्प के निकट निर्मित किया जा रहा है। इसके अलावा, इस स्कीम के तहत गुप्तार घाट का सौन्दर्यीकरण कार्य भी प्रगति पर है। इस परियोजना की लम्बाई 800 मीटर है। इन परियोजनाओं के लिए उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।

अयोध्या में राम की पैड़ी पर सरयू के अविरल जल प्रवाह के लिए सिंचाई विभाग द्वारा रीमाॅडलिंग परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना के पूरा होने पर स्नान आदि के लिए अविरल जल उपलब्ध होगा। अविरल जल प्रवाह से शैवाल, काई व गन्दगी का जमाव नहीं होगा। इस प्रकार राम की पैड़ी का सुन्दर एवं स्वच्छ स्वरूप विकसित होगा। इस परियोजना के तहत पम्प हाउस की क्षमता को 40 क्यूसेक से बढ़ाकर 240 क्यूसेक किए जाने, बढ़े हुए डिस्चार्ज से मुख्य चैनल में ग्रैविटी फ्लो उत्पन्न करने तथा पूरे वर्ष जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जा रही है।

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