UPCM मंत्रिमंडल के सिंचाई मंत्री ने ‘मध्य गंगा नहर परियोजना’ की समीक्षा बैठक की

उत्तर प्रदेश।
UPCM मंत्रिमंडल के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में मध्य गंगा नहर परियोजना (द्वितीय चरण) की गहन समीक्षा बैठा की। उन्होंने प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि बैठक में अनुपस्थित अधीक्षण अभियन्ता एस.के. गुप्ता और भारतेन्दु गौड से तत्काल स्पष्टीकरण मांगे तथा उचित जवाब न मिलने पर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करें।
सिंचाई एवं सिंचाई (यांत्रिक) मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि मध्य गंगा नहर परियोजना को हर-हाल में दिसम्बर 2019 तक पूर्ण करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि निर्धारित समय सीमा के अन्दर लक्ष्य को मानक के अनुरूप पूर्ण करें। सिंचाई मंत्री ने लक्ष्य के अनुरूप न कार्य करने वालों को एक माह का समय देते हुए साचेत किया कि लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि मध्य गंगा नहर परियोजना के द्वितीय चरण के कार्यों में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी।
प्रमुख सचिव टी. वेंकटेश ने सिंचाई मंत्री को आश्वस्त किया कि परियोजना को निर्धारित समय में पूर्ण करने का हर सम्भव प्रयास किया जायेगा। उन्होंने सिंचाई मंत्री को अवगत कराया कि यह अत्यन्त महत्वपूर्ण परियोजना है। इसमें जो भी अधिकारी ढिलाई करेगा उसके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। प्रमुख सचिव ने बताया कि इस परियोजना के पूर्ण होने से 410347 किसान लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि परियोजना पर वर्ष 2018-19 में बजट व्यवस्था 1698.4325 करोड़ रुपये के सापेक्ष रुपये 375.93 करोड़ अवमुक्त किया जा चुका है। प्रमुख सचिव ने सिंचाई मंत्री को अवगत कराया कि परियोजना पर अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष अब तक 110 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके है।
बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग टी. वेंकटेश, प्रमुख अभियन्ता एवं विभागाध्यक्ष कुणाल कुलश्रेष्ठ, मुख्य अभियन्ता स्तर-1 वी.के. राठी, मुख्य अभियन्ता रघुवीर शरण, अधीक्षण अभियन्ता जे.के. अग्रवाल उपस्थित रहे।








