मुख्यमंत्री ने अयोध्या में आयोजित 9वें दीपोत्सव में भगवान श्रीराम के स्वरूप का राज्याभिषेक किया

अयोध्या के हर कण में मर्यादा, हर जीव में दया और हर हृदय में भगवान श्रीराम का वास है : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने श्रीराम दरबार की आरती की तथा साधु-सन्तों का सम्मान किया
वर्ष 2017 में पहला दीपोत्सव आयोजित किए जाने के निर्णय के पीछे भाव था कि  दीपावली के अवसर पर दुनिया के दीप प्रज्ज्वलन के उद्देश्यों का पता चले
आज लाखों-लाख दीप अयोध्या धाम में प्रज्ज्वलित होते, यह हर भारतवासी के संकल्प तथा 500 वर्षों के अन्धकार पर आस्था की विजय के प्रतीक
हर दीप हमें यह याद दिलाता कि सत्य परेषान हो सकता लेकिन पराजित नहीं
प्रधानमंत्री ने 22 जनवरी, 2024 को श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में श्रीरामलला को विराजमान कर सनातन आस्था को सम्मान देने का कार्य किया
अयोध्या आस्था के साथ-साथ दुनिया में पर्यटन का नया केन्द्र बनकर उभरी, हर वर्ष 06 करोड़ से 10 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या आ रहे
अयोध्या में सुगम्य अयोध्या, सुरम्य अयोध्या, सक्षम अयोध्या, स्वच्छ-आयुष्मान अयोध्या, सांस्कृतिक-आध्यात्मिक अयोध्या, भावनात्मक अयोध्या जैसी अलग-अलग थीम के साथ विकास के अनेक कार्य किए जा रहे
प्रधानमंत्री ने हर भारतवासी से स्वदेषी अपनाने के साथ अपने हस्तषिल्पियों और कारीगरों को सम्मान देने का आह्वान किया, 
यह हमें आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ता
आज भारत विकास भी कर रहा और अपनी विरासत का सम्मान भी कर रहा, विरासत और विकास का यह संगम अयोध्या में भव्य दीपोत्सव के रूप में दिखायी दे रहा
रामराज्य की अवधारणा ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना, नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना’ की थी, जो नये भारत के नये उ0प्र0 में देखने को मिल रही
प्रदेश में बिना भेदभाव समाज के सभी वर्गों को योजनाओं का लाभ देने का कार्य किया जा रहा, राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस के संकल्प से कार्य  कर रही, उ0प्र0 देश में न्यूनतम अपराधों वाले राज्यों में से एक
‘नये भारत के नये उत्तर प्रदेष’ में हमें ‘विकसित भारत के विकसित उत्तर प्रदेष’ के संकल्पों से जुड़ना होगा
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के आदर्श, जीवन दर्शन तथा विभिन्न सामाजिक विषयों से जुड़ी झांकियों सहित शोभा यात्रा का अवलोकन किया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद अयोध्या के रामकथा पार्क में दीपावली के अवसर पर आयोजित दीपोत्सव-2025 में भगवान श्रीराम के स्वरूप का राज्याभिषेक किया। उन्हांंने श्रीराम दरबार की आरती की तथा साधु-सन्तों का सम्मान किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि अयोध्या सप्तपुरियों में प्रथम है। यहाँ धर्म स्वयं मानव रूप में अवतरित हुआ है। अयोध्या के हर कण में मर्यादा है, हर जीव में दया है और हर हृदय में भगवान श्रीराम का वास है। भगवान वाल्मीकि ने कहा है कि ‘रामो विग्रहवान् धर्मः साधुः सत्य प्रभावः, राजा सर्वस्य लोकस्य देवानाम् इव वासवः‘।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में पहला दीपोत्सव आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया था। इसके पीछे यह भाव था कि दीपावली के अवसर पर दुनिया को दीप प्रज्ज्वलन के पीछे के उद्देश्यों का पता चले। हजारां वर्ष पूर्व जब दुनिया अन्धकार में जी रही थी, तब अयोध्या ने अपने भगवान, अराध्य और अस्तित्व के प्रतीक भगवान श्रीराम के लंका विजय के उपरान्त अयोध्या आगमन पर अभिनन्दन के लिए दीप प्रज्ज्वलित किए थे। यही सनातन धर्म का एक महापर्व बन गया। उसी दीपोत्सव को जीवन्त बनाए रखने के लिए हमने दीपोत्सव अभियान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब पहला दीपोत्सव आयोजित किया गया, उस समय अयोध्या में दीप प्रज्ज्वलित करने के लिए हमें पर्याप्त मात्रा में दीप नहीं मिले थे। अयोध्या धाम में उस समय 50,000 दीप ही मिल पाए थे। शेष दीये पूरे प्रदेष भर से एकत्रित किए गए थे और वर्ष 2017 में 01 लाख 71 हजार दीप प्रज्ज्वलन हुए थे। आज लाखों-लाख दीप अयोध्या धाम में प्रज्ज्वलित होते हैं और हर भारतवासी के संकल्प के प्रतीक बनते हैं। यह दीप 500 वर्षों के अन्धकार पर आस्था की विजय के प्रतीक हैं। इन 500 वर्षों में हमारे पूर्वज अनेक संघर्षों से जूझे थे। यह दीप उसी संघर्ष का प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जब दीपोत्सव के 9वें संस्करण का आयोजन हो रहा है, तब भगवान श्रीराम अपने भव्य और दिव्य मन्दिर में विराजमान हैं। हर दीप हमें यह याद दिलाता है कि सत्य परेषान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। सत्य की नियति विजयी होने की होती है। इसी नियति के लिए सनातन धर्मावलम्बियों ने 500 वर्षों तक संघर्ष किया। इस संघर्ष का परिणाम है कि अयोध्या में भव्य और दिव्य श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर का निर्माण हो सका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सदियों तक विदेषी आक्रान्ताओं ने भारत भूमि को अपवित्र करने के लिए अनेक षड्यंत्र किए। आस्था के प्रतीकों को खण्डित और अपवित्र किया गया। लेकिन हमारी आस्था डिगी नहीं। वर्ष 1947 में भारत की आजादी के समय देषवासियों के मन में भाव था कि भारत से गुलामी के सभी चिन्हों को समाप्त करते हुए राजनीतिक आजादी के साथ सांस्कृतिक आजादी भी प्राप्त करनी होगी। हमारे मान-बिन्दुओं की पुनर्स्थापना का कार्य होगा। उस समय भी अयोध्या को उपेक्षित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1949 में श्रीराम भक्तों ने यह प्रयास किया कि आजादी के साथ श्रीरामलला भी विराजमान हों, किन्तु उस समय मूर्ति हटाने का आदेश जारी हो गया। वर्ष 1950 से वर्ष 1980 तक मन्दिर में ताला लगा दिया गया था। वर्ष 1986 तक यही स्थिति बनी रही। श्रीरामलला की जन्मभूमि में ही भगवान श्रीरामलला को कैद करने का कुत्सित प्रयास हुआ। आस्था को कैद करने का कार्य किया गया, लेकिन आस्था तब भी न झुकी, न रुकी, न थकी। भारत की सनातन आस्था बिना रुके, बिना झुके, बिना डिगे संघर्ष के पथ पर निरन्तर आगे बढ़ती गयी। सत्य ने लिखा और न्याय ने धर्म स्थापना के लिए हमारा मार्ग प्रषस्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब श्रीरामलला अपने भव्य मन्दिर में विराजमान हैं, हमारे पूर्वजों का संकल्प पूरा हुआ। श्री नरेन्द्र मोदी जी पहले प्रधानमंत्री थे, जो अयोध्या आए और उन्होंने श्रीरामलला के दर्षन किए तथा श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के निर्माण की आधारषिला रखी। प्रधानमंत्री ने भगवान श्रीरामलला के विराजमान होने से पूर्व, श्रीराम से जुड़े देष भर के मन्दिरों का दर्षन किए। उन्होंने 22 जनवरी, 2024 को श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में श्रीरामलला को विराजमान कर सनातन आस्था को सम्मान देने का कार्य किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब हम अयोध्या को लाखों दीपों से जगमगा रहे हैं। यह विस्मृत नहीं करना चाहिए कि श्रीराम को एक मिथक बताया गया था। भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताया था। इसी अयोध्या में श्रीराम भक्तों पर गोलियाँ चलायी गयी थीं। श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के दौरान अयोध्या में श्रीराम मन्दिर का निर्माण न होने देने के लिए अनेक प्रयास किए गए, लेकिन आज यहाँ दीप जला रहे हैं। पूज्य सन्तों के आषीर्वाद और राम भक्तों के संकल्प के परिणामस्वरूप अयोध्या में भव्य भगवान श्रीराम के मन्दिर का निर्माण हो गया है। हमने फिर से अयोध्या को अयोध्या धाम बनाकर नयी पहचान दी है। यह दीपोत्सव इस बात का प्रतीक है कि आस्था को कोई राजनीति कैद नहीं कर सकता। हमें जातिवादी मानसिकता से बचना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या आस्था के साथ-साथ दुनिया में पर्यटन का नया केन्द्र बनकर उभरी है। जिस अयोध्या में पहले केवल कुछ हजार श्रद्धालु ही आते थे। वहीं आज हर वर्ष 06 करोड़ से 10 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या में आ रहे हैं। यह नयी अयोध्या है। प्रधानमंत्री के संकल्पों के अनुरूप हम अयोध्या को वैष्विक आध्यात्मिक तथा आस्था की राजधानी के रूप में स्थापित कर रहे हैं। अयोध्या में सुगम्य अयोध्या, सुरम्य अयोध्या, सक्षम अयोध्या, स्वच्छ-आयुष्मान अयोध्या, सांस्कृतिक-आध्यात्मिक अयोध्या, भावनात्मक अयोध्या जैसी अलग-अलग थीम के साथ विकास के अनेक कार्य किए जा रहे हैं। आज देष-दुनिया के लोग अयोध्या में दर्षन के लिए आ रहे है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामराज्य की अवधारणा ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना, नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना’ की थी। जो नये भारत के नये उत्तर प्रदेष में देखने को मिल रहा है। एक गरीब को सिर ढकने के लिए छत, उनके घरों में शौचालय, महिलाओं को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस के निःषुल्क कनेक्षन, गरीबों को 05 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर, देष के 80 करोड़ लोगों को कोरोना कालखण्ड से निःषुल्क राषन की सुविधा, हर नौजवान को रोजगार, अन्नदाता किसानों को सिंचाई की सुविधा, तकनीक की जानकारी, अच्छी गुणवत्ता के बीज तथा फसल को बाजार तक पहुँचाने की गारण्टी मिल रही है। प्रधानमंत्री ने हर भारतवासी से स्वदेषी अपनाने के साथ अपने हस्तषिल्पियों और कारीगरों को सम्मान देने का आह्वान किया है, जो हर भारतवासी को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ‘दैहिक दैविक भौतिक तापा, रामराज नहिं काहुहि व्यापा’ की स्थिति देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश में तीनों प्रकार के दुःखों के लिए कोई स्थान नहीं है। किसी भी बीमारी का उपचार करने के लिए नये भारत के नये उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना की सुविधा उपलब्ध है। उत्तर प्रदेष ने सुरक्षा का मॉडल दिया है। हर व्यक्ति उमंग और उत्साह के साथ पर्व एवं त्योहारों से जुड़ा है। वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेष में ऐसी स्थिति नहीं थी। पर्व और त्योहारों के अवसर पर प्रदेश में अराजकता का वातावरण बनाने की कुत्सित चेष्टा होती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का भारत विगत 11 वर्षों में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत‘ के रूप में स्थापित हुआ है। आज भारत विकास भी कर रहा है और अपनी विरासत का सम्मान भी कर रहा है। विरासत और विकास का यह संगम आज अयोध्या में भव्य दीपोत्सव के रूप में दिखायी दे रहा है। वर्ष 2017 से वर्ष 2025 के इन 09 वर्षों की यात्रा अद्भुत है। जिस अयोध्या में पहले 50,000 मिट्टी के दीप नहीं मिल रहे थे, इस बार 26 लाख से अधिक मिट्टी के दीप केवल अयोध्या धाम में श्रीराम जी की पैड़ी तथा इसके आस-पास के स्थलों और नया घाट, सरयू घाट पर प्रज्ज्वलित हो रहे हैं। आज दीपोत्सव के अवसर पर पूरे प्रदेष के दीपों की गणना की जाए, तो 01 करोड़ 51 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित हो रहे हैं। आज मन्दिरों, मठों, आश्रमों में भी दीप प्रज्ज्वलित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रभु श्रीराम को अपना आदर्ष और उनके आदर्षों को अपने जीवन का मंत्र माना है। दण्डकारण्य के आश्रम भारत के आध्यात्मिक और धार्मिक ज्ञान-विज्ञान के शोध के केन्द्र थे। राक्षसों ने पूरे क्षेत्र को वीरान बना दिया था। उस समय भगवान श्रीराम ने दण्डकारण्य तथा पूरे आर्यावर्त से उन राक्षसों को समाप्त करने तथा आतंकविहीन करने का संकल्प लिया था। वही संकल्प आज हमारा मंत्र है। हमने प्रदेष में बिना भेदभाव समाज के सभी वर्गों को योजनाओं का लाभ देने का कार्य किया है। हमने सभी को सुरक्षा और सम्मान दिया है। साथ ही, पर्व और त्योहारों के दौरान बेटियों, व्यापारियों और नागरिकों को छेड़ने, परेषान करने का प्रयास करने वाले लोगों से राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ सख्ती से निपटने का कार्य कर रही है। हम इसी संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत 08 वर्षों में किए गए प्रयासों से उत्तर प्रदेष गुण्डाराज, माफियाराज और दंगामुक्त हुआ है। एन0सी0आर0बी0 के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश, देश में न्यूनतम अपराधों वाले राज्यों में से एक है। जिस उत्तर प्रदेश के सामने पहले पहचान का संकट था, आज वह इससे मुक्त हुआ है। प्रदेष में कानून का राज है और अपराधी भयभीत हैं। आज प्रदेश में गरीबों का सम्मान है, किसान खुशहाल हैं, बहनें और माताएँ सुरक्षित हैं, युवाओं के लिए अवसर हैं, गाँवों में बिजली है और हर हृदय में नया उत्साह और उमंग है। यह आधुनिक रामराज्य है, जहाँ विकास और सनातन आस्था दोनों का सम्मान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में जहाँ कभी अन्धकार था, आज वहाँ प्रकाष ही प्रकाष नजर आ रहा है। जिस अयोध्या में अच्छी सड़कें नहीं थीं, जनसुविधाएँ नहीं थी, जिसे लोगों ने उपेक्षित करके वीरान छोड़ दिया था, आज वही अयोध्या जगमगा रही है और अपनी नयी पहचान से दुनिया को आकर्षित कर रही है। आज अयोध्या का दीपोत्सव देखने के लिए दुनिया उतावली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत दिनों केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वह भी स्वयं अयोध्या आए थे। उस समय वृहस्पति कुण्ड स्थल में दक्षिण भारत के 03 पूज्य सन्तों-सन्त त्यागराजा, सन्त पुरन्दरदास और सन्त अरुणाचल कवि की प्रतिमा का अनावरण किया गया था। भगवान श्रीराम के सर्वाधिक भजन गाने वाली लता मंगेष्कर जी के नाम पर यहाँ भव्य स्मारक का निर्माण हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के 04 द्वार जगद्गुरु शंकराचार्य, जगद्गुरु रामानुजाचार्य, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य और जगदगुरु मध्वाचार्य के नाम पर रखे गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में निषादराज, माता अहिल्याबाई तथा माता शबरी की स्मृतियों को जीवन्त किया गया है। रामायण काल के प्रथम बलिदानी गिद्धराज जटायु तथा रामराज्य के निर्माण में गिलहरी के योगदान की प्रतीक प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। त्रिकालदर्शी ऋर्षि महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण किया गया है। यहाँ महर्षि वाल्मीकि, सन्त तुलसीदास, महर्षि विष्वामित्र के मन्दिर बन गए हैं। इन सभी कार्यों से आज अयोध्या की नयी पहचान स्थापित हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या देष और दुनिया का मार्गदर्षन करती रहे, इसके लिए अयोध्या सहित उत्तर प्रदेष के नागरिकों की जिम्मेदारी है कि राज्य में डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सुरक्षा, सुषासन, विरासत और विकास का जो वातावरण प्रदान किया है, वह अनवरत रूप से आगे बढ़ता रहे। मुख्यमंत्री जी ने पूज्य सन्तों से अनुरोधपूर्वक कहा कि दीपोत्सव के बाद उनके मठों एवं मन्दिरों में हर जगह दीप प्रज्ज्वलित हों। यह दीप हमारे संकल्पों तथा भव्य और दिव्य अयोध्या के प्रतीक हैं। यह दीप भगवान श्रीराम की मर्यादा भी हैं। ‘नये भारत के नये उत्तर प्रदेष’ में हमें ‘विकसित भारत के विकसित उत्तर प्रदेष’ के संकल्पों से जुड़ना होगा।
इसके पूर्व, मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के आदर्श, जीवन दर्शन तथा विभिन्न सामाजिक विषयों से जुड़ी झांकियों सहित शोभा यात्रा का अवलोकन किया। हेलीकॉप्टर से प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के स्वरूपों का अवतरण हुआ, जिनका प्रदेश के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, एम0एस0एम0ई0 मंत्री राकेष सचान, खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री सतीष चन्द्र शर्मा तथा विशिष्ट महानुभाव ने स्वागत किया। यहीं पर भरत मिलाप का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। मुख्यमंत्री जी सहित अन्य विशिष्ट महानुभाव प्रभु श्रीराम का रथ खींचकर रामकथा पार्क के मंच तक लाये। प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के स्वरूप के मंच पर आने पर मुख्यमंत्री जी, अन्य मंत्रिगण तथा साधु-सन्तों ने पूजन-वन्दन एवं आरती की।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अयोध्या धाम को भव्य एवं दिव्य स्वरूप देने का संकल्प पूरा करने की दिषा में कार्य प्रारम्भ किए। लगभग 500 वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में भगवान श्रीरामलला का दिव्य मन्दिर हमारे सामने है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेष ने विकास के नये कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उत्तर प्रदेष का परसेप्षन बदला है। विकसित उत्तर प्रदेश की दिषा में तेजी से कार्य आगे बढ़ा रहे हैं।
कार्यक्रम को पूर्व सांसद डॉ0 राम विलास वेदान्ती महाराज, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी महाराज, जगदगुरु श्री रामदिनेषाचार्य जी महाराज, जगदगुरु रामानुजाचार्य श्रीधराचार्य जी महाराज, जगदगुरु वासुदेवाचार्य श्री विद्याभाष्कर जी महाराज ने भी सम्बोधित किया।
दीपोत्सव-2025 के अवसर पर अयोध्या में आज प्रातः सर्वप्रथम भगवान श्रीराम के आदर्श एवं जीवन दर्शन तथा विभिन्न सामाजिक विषयों से जुड़ी झांकियों सहित भव्य ‘शोभा यात्रा’ का आयोजन किया गया। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने ‘शोभा यात्रा’ का शुभारम्भ झण्डी दिखाकर किया। यह मनोरम शोभा यात्रा साकेत महाविद्यालय से प्रारम्भ होकर अयोध्या के मुख्य मार्गों से होते हुए रामकथा पार्क में सम्पन्न हुई।
‘शोभा यात्रा’ में 15 झांकियां प्रस्तुत की गईं। इनमें (1) दीपोत्सव (2) बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, (3) गोवंष सुरक्षा का संकल्प, (4) मिषन शक्ति, (5) ओ0डी0ओ0पी0, (6) स्वच्छ भारत मिषन, (7) जल जीवन मिषन, (8) उत्तर प्रदेष पुलिस, (9) पी0एम0 सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, (10) विकसित भारत (11) आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, (12) उत्तर प्रदेष डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर, (13) आत्मनिर्भर नारी, (14) प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना तथा (15) अयोध्या विकास प्राधिकरण की झांकियां प्रमुख रूप से शामिल रहीं। शोभा यात्रा में विभिन्न कलाकारों ने प्रतिभाग किया। इसके अलावा, पर्यटन विभाग की भी झांकियां शामिल रहीं। झांकियों का भारी जनसैलाब ने अभिवादन तथा अवलोकन किया और कलाकारों तथा झांकियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। झांकियों का संयोजन व प्रदर्शन प्रदेश के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग तथा पर्यटन विभाग द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के दौरान अयोध्या के महापौर गिरीषपति त्रिपाठी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत श्री नृत्य गोपाल दास जी महाराज, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय, साधु-सन्तगण, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा श्रद्धालु उपस्थित थे।

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