जल शक्ति मंत्री ने कमाण्ड़ व कंट्रोल सेन्टर में आयोजित प्रमुख योजनाओं की प्रस्तुतीकरण की समीक्षा की

लखनऊ (03 सितम्बर, 2019)। उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह ने सिंचाई विभाग के परिकल्प भवन स्थित कमाण्ड़ व कंट्रोल सेन्टर में आयोजित प्रमुख योजनाओं की प्रस्तुतीकरण समीक्षा के मध्य अपने विचार व्यक्त किये।जल शक्ति मंत्री ने कहा सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की नहरें किसानों के खेतो की सिंचाई ही नही करती अपितु प्रकृति, पर्यावरण एवं जन-जीवन को भी पोषित करती है। उन्होंने कहा कि अब वह वक्त आ गया है जब प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के संकल्पो को नवोन्मेषी कार्य संस्कृति अपनाकर साकार करना होगा। आपने कहा कि सिंचाई विभाग के विशाल भू-भाग में फैले नहर तंत्र को और अधिक सुदृढ़, सशक्त और उपयोगी बनाया जाये इसके लिए नहरों एवं बांधो पर सोलर पैनल सिस्टम व पवन चक्की (विंड विंन) लगाकार वैकल्पिक ऊर्जा का सृजन कर ऐतिहासिक कीर्तिमान कायम करे।
जल शक्ति मंत्री ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त कि सिंचाई विभाग की जमीन पर अनाद्धिकृति कब्जे है इस क्रम में आपने कड़े निर्देश दिये कि यथाशीघ्र अवैध कब्जों को हटाने की कार्यवायी की जायें। जल शक्ति मंत्री ने सूखी नहरों व विभागीय खाली पड़ी जमीन के व्यवसायिक, प्रबंधन की कार्ययोजना बनाने के लिए भी सख्त निर्देश दिये। परियोजनाओं के प्रस्तुतीकरण के मध्य यह तथ्य प्रकाश में आया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अन्तर्गत संचालित 04 योजनाओं में बाण सागर परियोजना पूर्ण हो चुकी है महात्वाकांक्षी मध्य गंगा परियोजना द्वितीय चरण का 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। जल शक्ति मंत्री ने शेष 40 प्रतिशत कार्य को 31 मार्च, 2020 हर दशा में पूर्ण करने के निर्देश दिये। मुख्य अभियन्ता, मध्य गंगा ए.के. सेंगर ने प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया कि द्वितीय चरण योजना के तहत इस क्षेंत्र के 12 विकास खण्डों में से 11 विकास खण्ड डार्क जोन घोषित है इनकी वॉटर रिचार्जजिंग का कार्य इसी योजना के तहत किया जायेगा जो अपने आप में अनूठा होगा।
सरयू नहर परियोजना की समीक्षा के दौरान यह बताया गया कि सरयू में मात्र 13 हेक्टेयर के गैप भू-क्रय हेतु रह गये है और 6 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचिन क्षमता में वृद्धि हुई है। प्रमुख अभियन्ता विनोद कुमार ने बताया कि शीघ्र ही लक्षित 10 हजार हेक्टेयर सिंचिन क्षमता बढाने के लक्ष्य को पूर्ण कर लिया जायेगा। अर्जुन सहायक परियोजना का कार्य लगभग 77 प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। इस परियोजना के महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा करते हुए प्रमुख अभियन्ता/विभागाध्यक्ष ए.के. श्रीवास्तव ने बताया कि इस योजना से सिंचाई के साथ ही ग्रामीण पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी। परियोजना के पूर्ण होने पर महोबा के 04 लाख लोगो को स्वच्छ पेयजल प्राप्त हो सकेगा। प्रमुख सचिव सिंचाई टी. वेंकटेश ने जल शक्ति मंत्री को विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार, विश्व बैंक और नाबार्ड के सहयोग से जो परियोजनांए संचालित हो रही है उनकी प्रगति संतोषजनक है। उन्होंने यह भी बताया कि बुंदेलखण्ड क्षेंत्र में जल संचयन हेतु नवीन तकनीक आधारित कई योजना शुरू की जा रही है जिनसे पर ड्राप मोर क्राप के उद्देश्य की भी प्रतिपूर्ति होगी। प्रस्तुतीकरण के दौरान विशेष सचिव सिंचाई सारिका मोहन, सुरेन्द्र विक्रम एवं मुश्ताक अहमद सहित मुख्यालय एवं विभिन्न संगठनों के अभियन्ताओं ने प्रतिभाग किया। प्रस्तुतीकरण के पश्चात जल शक्ति मंत्री ने परिकल्प भवन स्थित विभिन्न प्रकोष्ठ का निरीक्षण कर परिसर को और अधिक आकर्षक एवं अधुनिकतम बनाने के निर्देश देते यह भी अपेक्षा की कि कमाण्ड और कंट्रोल सेंटर ने लाइव मोनिटेरिंग की अद्यतन व्यवस्था शीघ्र ही सुनिश्चित की जाये।

जल शक्ति मंत्री ने कहा सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की नहरें किसानों के खेतो की सिंचाई ही नही करती अपितु प्रकृति, पर्यावरण एवं जन-जीवन को भी पोषित करती है। उन्होंने कहा कि अब वह वक्त आ गया है जब प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के संकल्पो को नवोन्मेषी कार्य संस्कृति अपनाकर साकार करना होगा। आपने कहा कि सिंचाई विभाग के विशाल भू-भाग में फैले नहर तंत्र को और अधिक सुदृढ़, सशक्त और उपयोगी बनाया जाये इसके लिए नहरों एवं बांधो पर सोलर पैनल सिस्टम व पवन चक्की (विंड विंन) लगाकार वैकल्पिक ऊर्जा का सृजन कर ऐतिहासिक कीर्तिमान कायम करे।
जल शक्ति मंत्री ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त कि सिंचाई विभाग की जमीन पर अनाद्धिकृति कब्जे है इस क्रम में आपने कड़े निर्देश दिये कि यथाशीघ्र अवैध कब्जों को हटाने की कार्यवायी की जायें। जल शक्ति मंत्री ने सूखी नहरों व विभागीय खाली पड़ी जमीन के व्यवसायिक, प्रबंधन की कार्ययोजना बनाने के लिए भी सख्त निर्देश दिये।
परियोजनाओं के प्रस्तुतीकरण के मध्य यह तथ्य प्रकाश में आया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अन्तर्गत संचालित 04 योजनाओं में बाण सागर परियोजना पूर्ण हो चुकी है महात्वाकांक्षी मध्य गंगा परियोजना द्वितीय चरण का 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। जल शक्ति मंत्री ने शेष 40 प्रतिशत कार्य को 31 मार्च, 2020 हर दशा में पूर्ण करने के निर्देश दिये। मुख्य अभियन्ता, मध्य गंगा ए.के. सेंगर ने प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया कि द्वितीय चरण योजना के तहत इस क्षेंत्र के 12 विकास खण्डों में से 11 विकास खण्ड डार्क जोन घोषित है इनकी वॉटर रिचार्जजिंग का कार्य इसी योजना के तहत किया जायेगा जो अपने आप में अनूठा होगा।
सरयू नहर परियोजना की समीक्षा के दौरान यह बताया गया कि सरयू में मात्र 13 हेक्टेयर के गैप भू-क्रय हेतु रह गये है और 6 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचिन क्षमता में वृद्धि हुई है। प्रमुख अभियन्ता विनोद कुमार ने बताया कि शीघ्र ही लक्षित 10 हजार हेक्टेयर सिंचिन क्षमता बढाने के लक्ष्य को पूर्ण कर लिया जायेगा।
अर्जुन सहायक परियोजना का कार्य लगभग 77 प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। इस परियोजना के महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा करते हुए प्रमुख अभियन्ता/विभागाध्यक्ष ए.के. श्रीवास्तव ने बताया कि इस योजना से सिंचाई के साथ ही ग्रामीण पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी। परियोजना के पूर्ण होने पर महोबा के 04 लाख लोगो को स्वच्छ पेयजल प्राप्त हो सकेगा।
प्रमुख सचिव सिंचाई टी. वेंकटेश ने जल शक्ति मंत्री को विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार, विश्व बैंक और नाबार्ड के सहयोग से जो परियोजनांए संचालित हो रही है उनकी प्रगति संतोषजनक है। उन्होंने यह भी बताया कि बुंदेलखण्ड क्षेंत्र में जल संचयन हेतु नवीन तकनीक आधारित कई योजना शुरू की जा रही है जिनसे पर ड्राप मोर क्राप के उद्देश्य की भी प्रतिपूर्ति होगी। प्रस्तुतीकरण के दौरान विशेष सचिव सिंचाई सारिका मोहन, सुरेन्द्र विक्रम एवं मुश्ताक अहमद सहित मुख्यालय एवं विभिन्न संगठनों के अभियन्ताओं ने प्रतिभाग किया।
प्रस्तुतीकरण के पश्चात जल शक्ति मंत्री ने परिकल्प भवन स्थित विभिन्न प्रकोष्ठ का निरीक्षण कर परिसर को और अधिक आकर्षक एवं अधुनिकतम बनाने के निर्देश देते यह भी अपेक्षा की कि कमाण्ड और कंट्रोल सेंटर ने लाइव मोनिटेरिंग की अद्यतन व्यवस्था शीघ्र ही सुनिश्चित की जाये।








