योगी सरकार का बड़ा फैसला: अनुदेशकों का मानदेय ₹9 हजार से बढ़ाकर ₹17 हजार, मिलेगा ₹5 लाख का कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस

मुख्यमंत्री ने 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों की मानदेय वृद्धि (01 अप्रैल, 2026 से 09 हजार से बढ़ाकर 17 हजार रु0 प्रतिमाह) के उपलक्ष्य में आयोजित ‘अनुदेशक सम्मान समारोह’ में अनुदेशकों को मानदेय का प्रतीकात्मक चेक वितरित किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नींव का निर्माण सबसे कठिन कार्य होता है। कमजोर नींव पर सशक्त, समर्थ और मजबूत इमारत का निर्माण नहीं हो सकता है। अक्सर हम नींव की उपेक्षा कर देते हैं, क्योंकि वह दिखायी नहीं देती। अनुदेशकों व शिक्षामित्रों का कार्य अत्यन्त गरिमापूर्ण है। इसलिए उनका मानदेय भी सम्मानजनक होना चाहिए। सरकार ने अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर 17,000 रुपये किया है। साथ ही, उनको 05 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया जाएगा। अनुदेशक और उनके परिवार को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने लोक भवन में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 में समग्र शिक्षा अभियान के अन्तर्गत 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों की मानदेय वृद्धि (01 अप्रैल, 2026 से 09 हजार से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह) के उपलक्ष्य में आयोजित ‘अनुदेशक सम्मान समारोह’ के अवसर पर अनुदेशकों को मानदेय का प्रतीकात्मक चेक वितरण करने के उपरान्त अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बालवाटिका और कक्षा-01 से कक्षा-08 तक के बच्चों के शैक्षिक विकास पर आधारित ‘होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड’ का विमोचन किया। शिक्षा विभाग में अनुदेशकों के योगदान पर केन्द्रित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी अनुदेशक बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा लें, ताकि अगले सप्ताह से ही कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा के कार्ड वितरित कराए जा सकें। बेसिक शिक्षा विभाग इस कार्य को तेजी के साथ आगे बढ़ाए। लगभग 01 लाख 43 हजार शिक्षामित्रों तथा 24,296 अनुदेशकों, सभी प्रकार के शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस सुविधा से आच्छादित किया जा रहा है। यह आवश्यक भी है। जो वर्ग भारत की नींव को मजबूत करने और जो शासन की योजनाओं को ईमानदारी के साथ क्रियान्वित करने में अपना योगदान दे रहा है, उसके पास स्वयं के लिए भी स्वास्थ्य सुविधा की गारण्टी होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरीय क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए 10 हजार नये शिक्षकों की भर्ती के लिए अधियाचन भेजा गया है। शीघ्र ही यह प्रक्रिया प्रारम्भ होगी। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा के सुधार के लिए 20 हजार नए अनुदेशकों की नियुक्ति की प्रक्रिया को भी इससे जोड़ने जा रहे है। यह बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के कायाकल्प को और मजबूती के साथ आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। छात्रों की संख्या बढ़ी है, तो शिक्षकों का अनुपात भी उसी प्रकार बढ़ेगा। सरकार मजबूती के साथ आपके हित के लिए कार्य करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2011-12 में बेसिक शिक्षा परिषद में 06 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत भारत सरकार के आदेश पर अनुदेशकों की नियुक्ति प्रारम्भ हुई थी। उस समय 100 से अधिक छात्र संख्या वाले 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रति विद्यालय 03 अंशकालिक अनुदेशक के रूप में कुल 41,307 अनुदेशकों की 7,000 रुपये मासिक मानदेय पर उनकी तैनाती हुई थी।


वर्तमान में प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 8,469 कला शिक्षा, 9,645 स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा 6,192 कार्यानुभव शिक्षा अनुदेशक कार्यरत हैं। इनकी संख्या अब 41,307 से घटकर 24,296 रह गई है। इनमें से कुछ लोग रिटायर हो गए हैं, कुछ का दूसरी जगह समायोजन हो गया है। वर्ष 2011-12 से वर्ष 2022 तक बचे हुए अनुदेशकों के मानदेय के सम्बन्ध में कोई निर्णय नहीं हो पाया था। वर्ष 2019 में इस सम्बन्ध में अनुदेशक महासंघ के साथ बैठक हुई थी, लेकिन समय पर प्रस्ताव न आने के कारण तथा चुनाव की घोषणा हो जाने के कारण वर्ष 2022 में इनके मानदेय में 2,000 रुपये की वृद्धि की गई थी। उस समय भी हम यह मानते थे कि यह 2,000 रुपये की वृद्धि पर्याप्त नहीं है। लम्बे समय से अनुदेशकों की मानदेय वृद्धि की माँग थी, लेकिन उन्होंने कभी भी इसके लिए जोर-जबरदस्ती नहीं की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2011-12 में अनुदेशकों की नियुक्ति के बाद शासन की संवेदना इनसे नहीं जुड़ पायी। 11 वर्षों बाद वर्ष 2022 में हमारी सरकार ने ही अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि की थी। आज फिर हमने मानदेय में वृद्धि कर अनुदेशकों को चेक वितरित किए हैं। यह मानदेय वृद्धि 01 अप्रैल, 2026 से प्रभावी है।

अब कैशलेस की सुविधा भी इसके साथ जोड़ दी गई है। वर्ष 2019 में ही हमारी सरकार ने महिला अनुदेशकों को 06 माह के मानदेय के साथ मातृत्व अवकाश की सुविधा भी दी। यह हमारी सरकार की संवेदना को दर्शाता है। वर्ष 2023 में हमने अनुदेशकों को स्वेच्छा से विद्यालय परिवर्तन का विकल्प भी दिया। 04 हजार से अधिक अनुदेशकों ने इस सुविधा का लाभ लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी अनुदेशकों की मेहनत से बेसिक शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प होता हुआ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2017 से पहले बेसिक शिक्षा व्यवस्था चौपट थी। अव्यवस्था का वातावरण था। उस समय सरकार की कोई पॉलिसी नहीं थी, नीति और नीयत दोनों साफ नहीं थी। ऐसी स्थितियों में बेसिक शिक्षा के उद्धार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा ‘स्कूल चलो अभियान’ प्रारम्भ किया गया। ऑपरेशन कायाकल्प की शुरुआत की गयी। आज इस अभियान के अन्तर्गत 96 प्रतिशत विद्यालयों में छात्र, शिक्षक तथा शिक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायी जा चुकी हैं। यह सुविधाएं विद्यालयों में ड्रॉप आउट रेट को कम करने के लिए भी आवश्यक थी। उत्तर प्रदेश से प्रारम्भ हुए ऑपरेशन कायाकल्प को नीति आयोग ने देश में सक्सेज़ स्टोरी के रूप में प्रस्तुत किया। ऑपरेशन कायाकल्प की सफलता बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों, अनुदेशकों तथा शिक्षामित्रों सहित सबकी मेहनत का परिणाम है।

बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी हैं, इन स्कूलों में खेलकूद की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। कला, स्वास्थ्य सहित अन्य एक्टिविटीज को आगे बढ़ाने में हमें मदद मिली है। जब सरकार साफ नीयत तथा स्पष्ट नीति से कार्य करती है, तो परिणाम आने में देर नहीं लगती है। पहले प्रदेश में ड्रॉप आउट रेट 17-18 प्रतिशत था। हम इसे 03 प्रतिशत तक लाने में सफल हुए हैं और हमारा मानना है कि इसे शून्य किया जाना चाहिए। तब हम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत के सपने को साकार कर पाएंगे।

जब एक भी बच्चा शिक्षा व्यवस्था से छूटता है, तो इसका दुष्प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। अंततः इसका दुष्परिणाम पूरे राष्ट्र को भुगतना पड़ता है। इसलिए हमारा दायित्व है कि हर बच्चा स्कूल अवश्य जाए। यह जरूरी नहीं है कि हर बच्चा पढ़ने में बहुत अच्छा हो। हर बच्चे में कुछ न कुछ गुण होते हैं। कोई अच्छा खिलाड़ी, अच्छा कलाकार या किसी विशेष विषय का माहिर हो सकता है। हमें उनकी विशिष्ट प्रतिभा को उजागर करते हुए उसे उस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा।

बच्चों में अलग-अलग क्षेत्र की सम्भावनाएं छुपी हैं। उन्हें हतोत्साहित नहीं करना है, बल्कि आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है। सही राह दिखाने में सभी अनुदेशकों की बड़ी भूमिका हो सकती है। यह आत्म अनुशासन से शुरू होती है। समय पर विद्यालय जाना चाहिए। विद्यालय के परिवेश और परिसर को स्वच्छ एवं सुन्दर बनाए रखने में अपना योगदान देना चाहिए। इसके लिए बच्चों को भी प्रेरित करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब कभी कोई बच्चा विद्यालय में श्रमदान करता है, तो यह दिखाया जाता है कि बच्चों द्वारा कार्य कराया जा रहा है। यदि कोई शिक्षक बच्चों से स्कूल में श्रमदान कराता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई न कर उसका सम्मान करना चाहिए। यह शिक्षक भारत की भावी पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं, जिससे बच्चे विभिन्न चुनौतियों का मुकाबला कर सकें। बच्चों को बहुत कोमल नहीं बनाना है, बल्कि उन्हें योग्य बनाना है। बच्चों में ऐसे संस्कार निर्मित करने चाहिए, जिससे उनका तेज प्रचण्ड हो। यह तेज शिक्षा एवं संस्कार से ही उत्पन्न होगा।

बच्चों में मजबूती के साथ स्वच्छता को उनके जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। बच्चों के मन में सही-गलत का भेद करने की सामर्थ्य विकसित करनी चाहिए। यह कार्य आप सभी अनुदेशक कर सकते हैं। विगत 09 वर्षों में बेसिक शिक्षा परिषद ने बहुत से सफल प्रयोग किए हैं। छात्र-छात्राओं की यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूते-मोजे आदि के लिए बच्चों के अभिभावकों के खाते में प्रदेश सरकार द्वारा सीधे धनराशि भेजी जाती है।

इस समय बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में नामांकन हो रहे हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में लगभग एक करोड़ 60 लाख बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। यह बच्चे देश व प्रदेश का भविष्य हैं। यही बच्चे शिक्षक, कारीगर, हस्तशिल्पी, राजनेता, अधिवक्ता, किसान व समाजसेवी बनेंगे। जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करने वाले सभी लोगों के योगदान से राष्ट्र आगे बढ़ता है। जब सभी लोग एक साथ अपना योगदान देते हैं, तब प्रगति होती है। समृद्धि के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों पर इस नींव को तैयार करने की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी के साथ सभी अनुदेशक जुड़े हुए हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित बच्चों एवं श्रमिकों के बच्चों के लिए 18 अटल आवासीय विद्यालय निर्मित किए गए हैं। यह सभी विद्यालय विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर से युक्त हैं। इन विद्यालयों में 18 हजार बच्चे एक साथ अध्ययन कर सकते हैं। यहां अध्ययन करने वाले बच्चों के भोजन तथा आवास का पूरा खर्च प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

प्रत्येक जनपद में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय निर्मित किये जा रहे हैं, यह डे स्कूल होंगे। बच्चे अपने घर से स्कूल आएंगे। प्रदेश सरकार द्वारा बच्चों को सभी सुविधाएं स्कूल के ही कैम्पस में उपलब्ध करायी जाएंगी। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की शिक्षा दी जाएगी। इनमें खेल सहित सभी प्रकार की सुविधाएं हांगी। स्किल डेवलपमेंट सहित सभी प्रकार के एक्टिविटी इस विद्यालय होंगे। इस वर्ष भी मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं।

प्रदेश में पहले कुल 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित थे। पहले यह विद्यालय आठवीं कक्षा तक संचालित थे। हमने पहले चरण में इन्हें 12वीं कक्षा तक उच्चीकृत किया। जिन विकास खण्डों में कस्तूरबा गाँधी विद्यालय नहीं है, वहां 01-01 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की स्थापना के लिए आवश्यक धनराशि बेसिक शिक्षा परिषद को उपलब्ध करायी गयी है। परिषद द्वारा इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने वाली बेटियां जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

शिक्षक एक मार्गदर्शक होता है। वह सिर्फ राह दिखाता है। बच्चों को अपनी मेहनत से ही आगे बढ़ना है। उनकी राह आसान करने में आपकी बड़ी भूमिका है। भारत सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की गुणवत्ता के जो पैरामीटर तय किए गए हैं, उन सभी को प्रभावी ढंग से लागू करने के प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया गया है, जो सभी स्तर के शिक्षकों का चयन कर रहा है।

वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, लेकिन पूरी दुनिया के लगभग 200 देशों और 800 करोड़ लोगों को इसका दुष्परिणाम झेलना पड़ रहा है। अमेरिका जैसे विकसित देश में भी मंहगाई चरम पर है। उनके यहां स्वयं के संसाधन भी हैं, तब भी वहां पेट्रोलियम पदार्थां के दाम दोगुने से अधिक बढ़ गये हैं। अनेक देशों में कई तरह प्रतिबंध लगा दिये गये हैं। भारत में प्रधानमंत्री जी के रूप में यशस्वी नेतृत्व मौजूद है, जिन्होंने देश हित में निर्णय लिए हैं। हम सभी का दायित्व है कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के दृष्टिगत प्रधानमंत्री जी के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़े होकर साथ दें।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से प्रदेश में शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अनेक बदलाव हुए हैं और निरन्तर हो रहे हैं। प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसमें भी शिक्षा विभाग की सर्वोच्च भूमिका है। बेसिक शिक्षा सम्पूर्ण शिक्षा की नींव है।

कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि आज हमारे परिषदीय विद्यालयों की स्थिति में बहुत परिवर्तन आए हैं। इन विद्यालयों में बहुत अच्छा शैक्षिक वातावरण बना है। मुख्यमंत्री जी ने अनुदेशकों का मानदेय 09 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह किया है। यह एक बड़ा कार्य है। प्रधानमंत्री जी के विजन को उत्तर प्रदेश में उतारने का कार्य मुख्यमंत्री जी कर रहे हैं। प्रदेश में सभी भर्तियां निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सम्पन्न हो रही हैं।

बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सन्दीप सिंह ने कहा कि भारत की मजबूत नींव को तैयार करने में शिक्षकों के साथ-साथ अनुदेशक भी अपना योगदान दे रहे हैं। समर्पण से संस्कार की नींव पड़ती है और संस्कार से सफलता मिलती है। इससे राष्ट्र निर्माण का पथ प्रशस्त होता है। प्रधानमंत्री जी मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में हम सभी राष्ट्र निर्माण के पावन उद्देश्य में संलग्न हैं। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव की शुरुआत हुई। आज हमारे विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आई0सी0टी0 लैब्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। हमारे विद्यालय नवाचार के केन्द्र बन रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, इं0 अवनीश कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, महानिदेशक स्कूली शिक्षा मोनिका रानी सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, अनुदेशक उपस्थित थे।

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