UPCM ने कहा प्रदेश में लैण्ड पूलिंग स्कीम को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाए

उत्तर प्रदेश।
UPCM ने शास्त्री भवन में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा लैण्ड पूलिंग स्कीम के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण देखा। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में ग्रीन बेल्ट, वाॅटर हार्वेस्टिंग, साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट आदि की व्यवस्था आवश्यक रूप से की जानी चाहिए। साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट के माध्यम से कूड़ा ऊर्जा का स्रोत हो सकता है।

UPCM ने प्रदेश में लैण्ड पूलिंग स्कीम को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि लैण्ड पूलिंग स्कीम के तहत योजना का क्षेत्रफल कम से कम 50 एकड़ रखा जाए। योजना के क्रियान्वयन क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण इलाकों में सड़क, ड्रेनेज पर स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी सम्बन्धित विकास एजेन्सी द्वारा सुनिश्चित की जाए।

UPCM के समक्ष लैण्ड पूलिंग स्कीम के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण किया गया
UPCM के समक्ष लैण्ड पूलिंग स्कीम के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण किया गया

प्रस्तुतिकरण के दौरान प्रमुख सचिव शहरी आवास एवं नियोजन नितिन रमेश गोकर्ण द्वारा अवगत कराया गया कि लैण्ड पूलिंग स्कीम भूमि जुटाव की ऐसी पद्धति है, जिसके माध्यम से विभिन्न स्वामियों की भूमि को उनकी सहमति एवं स्वेच्छा से पूल कर विकास किया जा सकता है। विकास कार्याें के उपरान्त भू-स्वामियों को उनके मूल स्वामित्व की भूमि के आनुपातिक भाग को पुनर्गठित भूखण्डों के रूप में वापस किया जाता है। भूमि का क्रय/अर्जन किये बिना सुनियोजित, निष्पक्ष एवं न्यायसंगत शहरी विकास हेतु लैण्ड पूलिंग स्कीम एक अभिनव विकल्प है। गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, दिल्ली और पंजाब में इस पद्धति का आवासीय योजनाओं एवं अवस्थापना विकास में व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली राज्यों में लागू लैण्ड पूलिंग स्कीम के प्राविधानों से भी UPCM को अवगत कराया।

इस अवसर पर आवास एवं शहरी नियोजन राज्य मंत्री सुरेश पासी, मुख्य सचिव डाॅ. अनूप चन्द्र पाण्डेय, अपर मुख्य सचिव आर.के. तिवारी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस.पी. गोयल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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