UPCM ने हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 1,709 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया

उत्तर प्रदेश।
UPCM ने डाॅ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के डाॅ. आंबेडकर सभागार में वर्ष 2018 की हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 1,709 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इन मेधावी विद्यार्थियों में 146 राज्यस्तर और 1,563 जनपदस्तर के हैं।

UPCM ने राज्यस्तर के मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की धनराशि का चेक, एक टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। जनपदस्तर के मेधावी विद्यार्थियों को 21 हजार रुपये की धनराशि का चेक, एक टैबलेट, मेडल और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। राज्यस्तर के विद्यार्थियों में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के हाईस्कूल के 55, इण्टरमीडिएट के 42, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, नई दिल्ली के इण्टरमीडिएट के 11 तथा काउंसिल फाॅर द इण्डियन स्कूल एग्ज़ामिनेशन, नई दिल्ली के हाईस्कूल के 16 तथा इण्टरमीडिएट के 22 विद्यार्थी हैं। इन विद्यार्थियों में से प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 11 विद्यार्थियों के माता-पिता और विद्यालय के प्रधानाचार्य को भी UPCM द्वारा सम्मानित किया गया।

प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त कर सम्मानित होने वाले 11 विद्यार्थी, इण्टरमीडिएट के माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के रजनीश शुक्ला जनपद फतेहपुर, आकाश मौर्या जनपद बाराबंकी, आई.एस.सी. बोर्ड की राधिका चन्द्रा जनपद लखनऊ, समन वाहिद जनपद लखनऊ, साक्षी प्रद्युम्न जनपद लखनऊ, लिपिका अग्रवाल जनपद लखीमपुर खीरी, सी.बी.एस.ई. बोर्ड की मेघना श्रीवास्तव जनपद गौतमबुद्धनगर और हाईस्कूल के उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की अंजलि वर्मा जनपद इलाहाबाद, आई.सी.एस.ई. बोर्ड की प्रशष्या पटेल जनपद लखनऊ, अवनि तिवारी जनपद कानपुर एवं श्रेया भगत जनपद लखनऊ हैं।
UPCM ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मनुष्य अपार सम्भावनाओं से युक्त ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। मनुष्य अपनी मेधा और परिश्रम से असम्भव को सम्भव बना सकता है। परिश्रम के साथ ‘फल की चिंता किये बगैर कर्मरत रहने’ के गीता का संदेश ध्यान में रखा जाना आवश्यक है। परिश्रम को छोड़कर शार्टकट अपनाने वाले कभी भी मंज़िल तक नहीं पहुंचते। परिश्रम को सफलता का एक मात्र रहस्य बताते हुए उन्होंने कहा कि मेहनत से भागकर केवल तनाव ही हासिल होता है। ऊँचे लक्ष्य हासिल करने के लिए तनावमुक्त रहना चाहिए। इसे ही ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को तनावमुक्त रहने की सलाह दी थी।

UPCM ने कहा कि मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान के माध्यम से प्रदेश की ऊर्जा और मेधा को मंच प्रदान किया गया है। प्रदेश की यह शक्ति भविष्य में उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने में सहयोगी और सहभागी बनेगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद की इण्टरमीडिएट परीक्षा की मेरिट में जनपद फतेहपुर के विद्यार्थी द्वारा प्रथम स्थान प्राप्त करने पर विद्यार्थी रजनीश शुक्ला उनके अभिभावकों और शिक्षकों की प्रशंसा करते हुए UPCM ने कहा कि जनपद फतेहपुर प्रदेश के सर्वाधिक पिछड़े 8 जनपदों में से एक है। ऐसे में वहां के विद्यार्थी का सर्वाेच्च स्थान प्राप्त करना उल्लेखनीय है।
UPCM ने कहा कि विगत वर्ष की परीक्षा की मेरिट लिस्ट में भी बालिकाओं की संख्या अधिक थी। प्रदेश बोर्ड की इस वर्ष की मेरिट लिस्ट के 97 विद्यार्थियों में 35 बालक और 62 बालिकाएं हैं। इस प्रकार बालिकाओं की संख्या लगभग दो-गुनी है। विभिन्न बोर्डाें के आज सम्मानित सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले 11 विद्यार्थियों में बालिकाओं की संख्या 8 है। इससे साबित होता है कि बालिकाएं मेहनती और प्रतिभाशाली हैं और समुचित अवसर प्राप्त करने पर देश को नई दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। बालिकाओं की क्षमता को देखते हुए उन्होंने अभिभावकों से बालक-बालिका में भेद बन्द करने का आह्वान किया।

UPCM ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एक वर्ष पूर्व ही प्रदेश में नकलविहीन परीक्षा की घोषणा की थी। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा न केवल नकलविहीन परीक्षा सम्पन्न करायी गई है, बल्कि समय-सीमा में हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट दोनों परीक्षाओं के परीक्षाफल एक साथ घोषित किये गए हैं। यू.पी. बोर्ड के अन्तर्गत देश में सर्वाधिक विद्यार्थियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए यह अत्यन्त सराहनीय कार्य है। यह शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किये गये महत्वपूर्ण सुधारों का परिणाम भी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उठाये गये कदमों से राज्य की शिक्षा प्रणाली पर खड़ा हुआ विश्वास का संकट भी समाप्त हुआ है।

UP_Dy_CM डॉ. दिनेश शर्मा ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि माता-पिता बच्चों के प्रारम्भिक गुरु होते हैं। घर में बच्चों को समुचित मार्गदर्शन और प्रेरणा प्राप्त होने पर वे देश व प्रदेश का नाम रोशन करते हैं। भगवान हनुमान जी की विद्या, गुण और चातुर्य की चर्चा करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों में चरित्र, परिश्रम एवं मर्यादा आने की कामना की और अहंकार रहित होने की सीख दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में शुचिता, पारदर्शिता और गुणवत्ता पर बल दिया है। शिक्षा में ‘सुखी मन अध्यापक’ के महत्व को ध्यान में रखते हुए अध्यापकों के कल्याण के लिए समुचित कदम उठाये गये हैं।
कार्यक्रम को शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह, सांसद डाॅ. महेन्द्र नाथ पाण्डेय, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा संजय अग्रवाल ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल, औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, समाज कल्याण राज्य मंत्री गुलाबो देवी सहित जनप्रतिनिधिगण, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।








