UPCM और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने #SBM और ‘नमामि गंगे’ परियोजनाओं की प्रगति के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण देखा

लखनऊ (जुलाई, 2019)।
UPCM योगी आदित्यनाथ और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने लोक भवन में स्वच्छ भारत मिशन और ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत नगर विकास विभाग द्वारा लागू की जा रही विभिन्न परियोजनाओं व राज्य में लागू ‘नमामि गंगे’ परियोजनाओं की प्रगति के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण को देखा और अधिकारियों को इस सम्बन्ध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों से इन परियोजनाओं के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारियां प्राप्त कीं और जल संर क्षण, गंगा और अन्य सहायक नदियों की स्वच्छता और पाइप्ड पेयजल परियोजना के सम्बन्ध में निर्देश भी दिये। प्रस्तुतिकरण के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा लागू किये जा रहे जल शक्ति अभियान पर भी चर्चा हुई और इसके तहत जल संर क्षण के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

UPCM और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने #SBM और ‘नमामि गंगे’ परियोजनाओं की प्रगति के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण देखा

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम की कार्ययोजना पर प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिये। उन्होंने गंगा नदी से सम्बन्धित मुददों की पाक्षिक और मासिक मॉनीटरिंग के भी निर्देश दिये। उन्होंने जिला गंगा कमेटी की नियमित बैठक आयोजित किये जाने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गंगा की सहायक नदियों जैसे यमुना, गोमती, राम गंगा इत्यादि की स्वच्छता के लिए भी कार्ययोजना बनायी जाए। उन्होंने नगर विकास विभाग को नमामि गंगे कार्यक्रम से सम्बन्धित परियोजनाओं को शीघ्र लागू करने के निर्देश दिये। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को नगर विकास की परियोजनाओं में रुचि लेते हुए उन्हें शीघ्र क्रियान्वित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इन कार्यां में कोई भी पेंडेन्सी न रहे।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री को ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप पेयजल कार्यक्रम के विषय में अवगत कराते हुए बताया कि राज्य में जहां एक ओर जे.ई./ए.ई.एस. (एच.आर.वी.) और आर्सेनिक/फ्लोराइड से प्रभावित क्षेत्र हैं, वहीं बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्यांचल जैसे क्षेत्र भी हैं, जहां पाइप्ड वाटर सप्लाई के लिए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 7 जिलों के अवशेष 2950 ग्रामों को पी.डब्ल्यू.एस. से जोड़ने हेतु  9022 करोड़ रुपये का वित्त पोषण राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने इसमें केन्द्र के भी सहयोग का अनुरोध किया। विंध्य क्षेत्र के अवशेष 5720 ग्रामों हेतु 6701 करोड़ रुपये की डी.पी.आर. तैयार कर ली गयी है। इसमें भी केन्द्र से सहायता अपेक्षित है। राज्य सरकार द्वारा इस सम्बन्ध लिखित अनुरोध किया जा चुका है। उन्होंने जे.ई./ए.ई.एस. प्रभावित अवशेष बस्तियों को पी.डब्ल्यू.एस. से आच्छादित करने हेतु 1471 करोड़ रुपये की आवश्यकता के विषय में भी केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराया। ए.एस./एफ. से आच्छादित अवशेष बस्तियों हेतु 627 करोड़ रुपये की आवश्यकता के विषय में भी अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को वर्ष 2017-18 तक परिचालन एवं अनुरक्षण हेतु भारत सरकार से मिलने वाली सहायता के विषय में बताया कि इसके लिए 15 प्रतिशत धनराशि मात्राकृत थी, जो अब बन्द हो गयी है। उन्होंने इसके लिए केन्द्री य सहायता का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2022 से पहले ही हर गांव में पाइप्ड वाटर सप्लाई देने के लिए कार्य कर रही है। इसमें केन्द्रीय सहायता अपेक्षित है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में सर्फेस वाटर मौजूद है, जिसका ठीक से उपयोग किया जाना चाहिए। मौजूदा जल स्रोतों को ठीक से संर क्षित किये जाने की आवश्यकता है। उन्हें प्रदूषण से बचाना होगा। उन्होंने कहा कि जल संर क्षण के दृष्टिगत राज्य सरकार ने पिछले वर्ष बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 6000 से अधिक तालाब खुदवाए।

UPCM और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने #SBM और ‘नमामि गंगे’ परियोजनाओं की प्रगति के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण देखा

मुख्यमंत्री ने जल संर क्षण के विषय में कहा कि इसमें रेन वॉटर हार्वेस्टिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए भवनों के नक्शे पास करने में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था को अनिवार्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कुम्हारों की सुविधा के लिए माटी कला बोर्ड का गठन किया गया है। इसके माध्यम से कुम्हार निर्धारित समय सीमा (अप्रैल-जून) में तालाबों से निःशुल्क मिटटी प्राप्त कर सकते हैं। इससे जल संर क्षण को बढ़ावा मिलेगा। उत्तर प्रदेश जल संर क्षण के सभी प्रयास कर रहा है। जल शक्ति अभियान को हर हाल में सफल बनाया जाएगा। बुन्देलखण्ड और विंध्य क्षेत्र के गाँवों में पाइप्ड वाटर सप्लाई के लिए डी.पी.आर. तैयार कर ली गयी है। राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में अगले दो वर्ष के अन्दर पाइप्ड वॉटर सप्लाई देने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री ने प्रयागराज कुम्भ-2019 का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के सही क्रियान्वयन से गंगा जी को अविरल और निर्मल बनाया गया। लोगों को कुम्भ में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ जल मिला। गंगा जी की स्वच्छता को लेकर लोगों में अच्छा पर्सेप्शन बना। प्रदेश के सभी जनपद किसी न किसी योजना के माध्यम से नमामि गंगे कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं। इन सभी योजनाओं को सफल बनाने के लिए जनसहभागिता आवश्यक है। जनता की भागीदारी से इन्हें जनान्दोलन का रूप दिया जा सकता है। उन्होंने जिलाधिकारियों से इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए रुचि लेने के लिए कहा। उन्होंने गंगा जी और अन्य नदियों के किनारों पर बड़ी संख्या में वृक्षारोपण की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के लगभग सभी गावों में एक तालाब मौजूद होगा, जिसमें काफी मात्रा में गन्दगी डाली जा रही है, जिसके चलते ये तालाब प्रदूषित हो गये हैं। उन्होंने कहा कि इन तालाबों को स्वच्छ किया जाए और इनमें कूड़ा न डाला जाए।

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले दो वर्षां में स्वच्छ भारत मिशन की सफलता के लिए उत्कृष्ट कार्य किया है। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत अवशेष शौचालयों के निर्माण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गयी धनराशि के शीघ्र उपयोग पर बल देते हुए कहा कि इसके तहत एकाउण्ट सेटेलमेन्ट आगामी 02 अक्टूबर, 2019 के बाद टेकअप नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 तक देश को ओ.डी.एफ. प्लस करने के लिए बहुत कार्य किया जाना है। इसमें उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने पाइप्ड वॉटर सप्लाई का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक बड़ी योजना है, जिसके माध्यम से गांव के लोगों को भी स्वच्छ पेयजल पाइप के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। उन्हांने गावों के तालाबों की सफाई पर बल देते हुए कहा कि वहां के गन्दे जल के निस्तारण के लिए भी योजना बनानी होगी। उन्होंने जल शक्ति अभियान के सम्बन्ध में प्रदेश की कार्य योजना की सराहना करते हुए कहा कि इस पर प्रभावी अमल आवश्यक है। उन्होंने जल संर क्षण के लिए निर्मित किये गये रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्टंक्चर के भौतिक सत्यापन की आवश्यकता पर बल दिया।

‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश में क्रियान्वित की जा रही परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि गंगा उत्तर प्रदेश में काफी लम्बा रास्ता तय करती है। ऐसे में, इसकी स्वच्छता के प्रति राज्य की जिम्मेदारी बनती है। गंगा जी की निर्मलता और अविरलता में राज्यों को अपनी-अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाएं समय से पूरी की जाएं। इनकी मॉनीटरिंग के लिए रिवर्स टाइम लाइन भी तय की जाए और मॉनीटरिंग प्रोटोकॉल भी स्थापित किया जाए।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जल शक्ति अभियान 01 जुलाई से 15 सितम्बर, 2019 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय भू-जल बोर्ड द्वारा उत्तर प्रदेश के 35 जनपदों के 139 ब्लॉक और 84 नगर निकाय जल समस्या से ग्रसित चिन्हित किये गये हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सभी सरपंचों को जल संर क्षण के सम्बन्ध में पत्र लिखा गया है। जल संर क्षण के कार्य को एक जनान्दोलन का रूप देना होगा। यदि हम वर्षा जल का उचित संर क्षण करें तो जल की कमी की समस्या से निपटा जा सकता है। इसके लिए घर के जल को घर में, खेत के जल को खेत में और गांव के जल को तालाब में संर क्षित करना होगा। उन्होंने कहा कि जल संर क्षण के लिए केन्द्र और राज्य को मिलकर कार्य करना होगा।

इस अवसर पर नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना, ग्राम्य विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेन्द्र सिंह, पंचायतीराज राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भूपेन्द्र सिंह चौधरी, मुख्य सचिव डॉ. अनूप चन्द्र पाण्डेय, प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद, प्रमुख सचिव वन कल्पना अवस्थी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस.पी. गोयल, केन्द्र सरकार के सचिव परमेश्वरन और यू.पी. सिंह, नमामि गंगे कार्यक्रम के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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