UPCM ने ‘O.D.O.P.-समिट’ के तहत आयोजित ‘सीईओज सेशन’ को सम्बोधित किया

उत्तर प्रदेश।
UPCM ने इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘एक जनपद, एक उत्पाद समिट’ के तहत आयोजित ‘सीईओज सेशन’ को सम्बोधित किया। उन्होंने सीईओज द्वारा ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना (O.D.O.P.) के सम्बन्ध में दिए गए सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि सीईओज की भागीदारी से राज्य सरकार उत्साहित है। इस सरकार ने उत्तर प्रदेश की छवि को बदलने और नई पहचान दिलाने का कार्य किया है और एक टीम भावना प्रस्तुत करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में विकास सम्बन्धी कार्य सफलतापूर्वक सम्पादित किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और औद्योगिक सुरक्षा का वातावरण बना है। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में जो उद्यमी प्रदेश को छोड़कर अन्य प्रदेशों की ओर रुख कर रहे थे, अब उन्हीं उद्यमियों ने उत्तर प्रदेश में वापस आना शुरू कर दिया है।

UPCM ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की प्रगति से ही देश का विकास सम्भव होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में उद्योग स्थापना और औद्योगिक विकास के लिए बेहतर वातावरण बना है। विभिन्न क्षेत्रों के सम्बन्ध में नीतियां बनाकर लागू की गई हैं। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के विकास की व्यापक सम्भावनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि अब तक इस क्षेत्र को उपेक्षित किया गया और इसे उचित प्रोत्साहन नहीं मिला। वर्तमान सरकार इस सेक्टर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
UPCM ने कहा कि लखनऊ के अवध शिल्प ग्राम को विभिन्न जनपदों के उत्पादों के प्रदर्शन के लिए चयनित किया गया है। उन्होंने कहा कि अन्य प्रदेशों के विभिन्न शहरों में भी यहां के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाए जाने की योजना है। इन कार्यों से इन उत्पादों की विशिष्टता का व्यापक प्रचार-प्रसार तो होगा ही, इनके लिए बाजार भी उपलब्ध होगा। प्रयाग कुम्भ-2019 में उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों के उत्पादों की प्रदर्शनी लगायी जाएगी। O.D.O.P. योजना के लिए बजट में धनराशि की व्यवस्था की गई है और आवश्यकता पड़ने पर इस धनराशि को और भी बढ़ाया जाएगा।
UPCM ने कहा कि O.D.O.P. के विकास के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय मांग के अनुरूप उत्पादन हेतु तकनीकी सहयोग, वित्तीय सहयोग, गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग व डिजाइनिंग और कला-कौशल में वृद्धि के लिए प्रशिक्षण व अवस्थापना सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण एवं निर्मित उत्पादों के विपणन में सहायता की रणनीति को अपनाने की आवश्यकता है। इस दिशा में सरकार तेजी से कार्य कर रही है और उद्यमी इस सुधार को महसूस भी कर रहे हैं।
UPCM ने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक जनपद के अपने विशिष्ट उत्पाद हैं। इन विविधतापूर्ण उत्पादों की विस्तृत श्रंृखला है। कई जनपदों में मात्र एक ही नहीं, बल्कि कई विशिष्ट उत्पाद हैं। इस सन्दर्भ में उन्होंने वाराणसी के विभिन्न उत्पादों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश का प्रत्येक जनपद एक या उससे अधिक उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है और सभी उत्पादों के विकास की सम्भावनाओं को समेटे हुए है।
UPCM ने कहा कि प्रदेश के संतुलित विकास के लिए 75 जनपदों में पारम्परिक उद्योगों का विकास और इससे जुड़े कारीगरों व व्यक्तियों को मुख्य धारा से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के समग्र, संतुलित एवं समावेशी आर्थिक विकास, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आय में वृद्धि के लिए ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना का शुभारम्भ विगत 24 जनवरी, 2018 को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर किया गया है। अभी यह शुरुआत है, जिसे तीव्र गति से आगे बढ़ाया जाएगा।
UPCM ने कहा कि राज्य सरकार जनता के सर्वांगीण विकास के लिए नीतिगत एवं क्रियान्वयन दोनों ही स्तर पर निरन्तर प्रयत्नशील है। सभी क्षेत्रों के विकास के लिए न केवल नीतियां, योजनाएं एवं कार्यक्रम बनाए गए हैं, बल्कि प्रभावी व योजनाबद्ध ढंग से उन्हें लागू भी किया जा रहा है। प्रदेश में रोजगार प्रोत्साहन हेतु औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति-2017 लागू की जा चुकी है। MSME इकाइयों की संख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है। हस्तशिल्प, कृषि, दुग्ध एवं चर्म उत्पादों के उत्पादन और निर्यात में भी उत्तर प्रदेश अग्रणी है।
UPCM ने सभी सीईओज से प्रदेश के विकास में भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि उनके सहयोग से राज्य सरकार ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना को बुलन्दियों पर ले जाएगी। उत्तर प्रदेश के विशिष्ट उत्पादों को देश और दुनिया में फिर से जाना जाएगा। राज्य सरकार इस योजना के सम्बन्ध में उद्यमियों की हर सम्भव सहायता करेगी और सीईओज द्वारा दिए गए प्रस्तावों व सुझावों पर विचार करते हुए कार्यवाही की जाएगी।
मुख्य सचिव डाॅ. अनूप चन्द्र पाण्डेय ने ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना के विकास के सम्बन्ध में विभिन्न उद्यमियों से सुझाव आमंत्रित करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार सृजन, उत्पाद गुणवत्ता में सुधार, वित्त पोषण, तकनीकी उन्नयन, कौशल विकास, काॅमन फैसिलिटी सेण्टर, टेस्टिंग लैब, एक्जीबिशन एवं व्यापार केन्द्रों के लिए महत्वपूर्ण अवस्थापना सुविधाओं का विकास कर रही है। O.D.O.P. योजना में उत्कृष्ट हस्तशिल्प एवं अन्य पारम्परिक उत्पादों को वित्त पोषण, विपणन, डिजाइन डेवलपमेण्ट और राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय बाजार की मांगों के अनुरूप विकास के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। केन्द्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के साथ ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना के सम्बन्ध में समन्वय किया गया है।

इस अवसर पर सीईओज ने महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि प्रतिभाशाली युवाओं की क्षमताओं के विकास के लिए इन्क्यूबेशन सुविधाएं, हैण्ड होल्डिंग का ईको वातावरण सृजित किए जाने की आवश्यकता है, जिससे अधिक से अधिक स्टार्ट अप को प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने कहा कि विभिन्न जनपदों के उत्पादों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा और बाजार के अनुरूप विकसित करना होगा। उत्पादों की गुणवत्ता के लिए प्रमाणीकरण करना होगा। पारम्परिक उत्पादों और उद्योगों को बढ़ावा दिए जाने के उद्देश्य से क्लस्टर्स की स्थापना किए जाने की आवश्यकता है।
सीईओज ने कहा कि ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना के अन्तर्गत चयनित उत्पादों के विपणन प्रोत्साहन के लिए ई-मार्केटिंग कम्पनियों को अपने प्लेटफार्म पर ज्यादा से ज्यादा लोकप्रिय बनाने के लिए प्रचार-प्रसार और ब्राण्डिंग करने की जरूरत है। उत्पादों के गुणवत्ता प्रबन्धन और मानकीकरण पर भी विशेष जोर दिया जाना चाहिए। कालीन उद्योग, लेदर उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण एवं हेल्थ केयर के क्षेत्र में व्यापक सम्भावनाएं हैं। बाजार का विश्लेषण करते हुए सांस्कृतिक व्यापार के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने की आवश्यकता है। हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को अन्तर्राष्ट्रीय मानकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। O.D.O.P. से सम्बन्धित प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए। नाबार्ड से पूंजी जुटाने के सम्बन्ध में भी सुझाव प्राप्त हुए। सीईओज ने O.D.O.P. योजना के सम्बन्ध में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।
सीईओज सेशन के दौरान अमेजन सेलर सर्विसेज के निदेशक एवं महाप्रबन्धक गोपाल पिल्लई, ए.सी.एम.ए. (एकमा) के अध्यक्ष ओंकार नाथ मिश्रा, सी.एल.ई. कानपुर के अध्यक्ष मुख्तारुल अमीन, आई.आई.ए. के महासचिव डी.एस. वर्मा, पी.एच.डी. के अध्यक्ष अनिल खेतान, लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधि रवीन्द्र सिंह, ए.टी.डी.सी. गुड़गांव के महानिदेशक एवं सी.ई.ओ. डाॅ. डार्ली कोशी, सी.जी.एम. नाबार्ड ए.के. सिंह, एच.डब्ल्यू.ए. वाराणसी के कार्यकारी महानिदेशक डाॅ. रजनीकान्त, बी.एस.ई. के मैनेजिंग डायरेक्टर एण्ड सी.ई.ओ. आशीष चौहान, केन्द्रीय विकास आयुक्त (MSME) राम मोहन मिश्रा, केन्द्रीय अतिरिक्त सचिव खाद्य प्रसंस्करण डी.एस. गंगवार, निदेशक ई.पी.सी.एच. नई दिल्ली आर.के. वर्मा सहित अन्य सीईओज व उद्यमियों ने मुख्य रूप से अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
इस अवसर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सत्यदेव पचौरी, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं पर्यटन अवनीश कुमार अवस्थी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन सचिव भुवनेश कुमार सहित कई सीईओज एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।








