UPCM के समक्ष कौशल विकास के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण किया गया

उत्तर प्रदेश।
UPCM ने कहा कि स्थानीय आवश्यकताओं को देखते हुए युवाओं का कौशल विकास सुनिश्चित किया जाए। सम्पूर्ण प्रदेश में स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास के पाठ्यक्रमों का निर्धारण किया जाए। प्रदेश के युवाओं के विस्तृत कौशल विकास की आवश्यकता है। उद्यमों का टेªन्ड देखते हुए शाॅर्ट टर्म कोर्सेज़ डिज़ाइन किए जाएं। साथ ही, समय के साथ उन्हें अपग्रेड भी किया जाए।

UPCM ने शास्त्री भवन में कौशल विकास के सम्बन्ध में दिए गए प्रस्तुतिकरण के दौरान व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में 821 विकासखण्ड हैं। इन विकासखण्डों में युवाओं के कौशल विकास की प्रभावी कार्ययोजना बनानी होगी। इस कार्य में एशियन डेवलपमेण्ट बैंक की मदद ली जाए। ब्लाॅक स्तर पर युवाओं के कौशल विकास करने से उन्हें उनके क्षेत्र में ही रोजगार उपलब्ध कराने की सम्भावनाएं बढ़ जाएंगी और उन्हें अपना घर छोड़कर रोजगार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ओ.डी.ओ.पी.) को ध्यान में रखते हुए भी कौशल विकास किया जाए।

UPCM को प्रस्तुतिकरण के दौरान प्रदेश में कौशल विकास के लिए किए जा रहे कार्यों के विषय में अवगत कराया। कौशल विकास सचिव भुवनेश कुमार ने बताया कि प्रदेश के युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण आई.टी.आई. और उ.प्र. कौशल विकास मिशन (U.P.S.D.M) के तहत दिया जाता है। वर्तमान में प्रदेश में 286 सरकारी आई.टी.आई. मौजूद हैं। साथ ही, 2510 निजी आई.टी.आई. भी मौजूद हैं। इसके अलावा, U.P.S.D.M के तहत I.T.I, औद्योगिक भागीदारों और निजी संस्थानों के 444 Training प्रोवाइडर भी कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए उपयुक्त बनाना एक महत्वपूर्ण कार्य है। इसके लिए कौशल विकास के साथ-साथ उनका हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं का कार्यकारी ज्ञान भी आवश्यक है।

भुवनेश कुमार ने बताया कि यू.पी.एस.डी.एम. के तहत सभी मण्डलों में प्रत्येक माह रोजगार मेलों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि I.T.I और U.P.S.D.M के संयुक्त प्रयासों से अब तक 6.9 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि O.D.O.P योजना के तहत हस्तशिल्पियों के कौशल विकास प्रशिक्षण से उनके रोजगार की सम्भावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी।

UPCM को O.D.O.P योजना के साथ कौशल विकास को इण्टीग्रेट करने के विषय में प्रस्तुतिकरण देते हुए कौशल विकास सचिव ने बताया कि इसके माध्यम से नये रोजगार सृजन और उद्यमों के स्थापन/वित्त पोषण का कार्य मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप इण्डिया, स्टैण्ड-अप इण्डिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री रोजगार योजना, एम.एस.एम.ई. क्लस्टर योजना की डवटेलिंग के माध्यम से कराया जाएगा। इसके तहत चिन्हित उत्पादों के विकास हेतु नई योजनाओं को तैयार कर लागू करवाया जाएगा।

इस अवसर पर एशियन डेवलपमेण्ट बैंक के प्रतिनिधियों ने अपने प्रस्तुतिकरण में उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में स्वयं द्वारा किए गए अध्ययन के निष्कर्षों के विषय में UPCM को बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में युवा मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश में रोजगार के अवसरों में महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव आया है। इसके अलावा, रोजगार की गुणवत्ता में भी बदलाव आया है। उन्होंने कौशल विकास के लिए एशियन डेवलपमेण्ट बैंक की रणनीतियों के विषय में भी जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न राज्यों में स्वयं की भागीदारी में किए जा रहे कार्यों के विषय में भी मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया।

UPCM ने प्रस्तुतिकरण देखने के उपरान्त कहा कि अगले 04 से 06 सप्ताह के अंदर प्रदेश के सभी जनपदों में कौशल विकास के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि ए.डी.बी. द्वारा कौशल विकास के लिए अन्य प्रदेशों में किए जा रहे कार्यों पर फोकस करते हुए उत्तर प्रदेश के संदर्भ में उनसे अपेक्षित सहयोग लिया जाए। उन्होंने इस कार्य में मुख्य सचिव को आवश्यक मार्गदर्शन करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ओ.डी.ओ.पी. के माध्यम से रोजगार के बड़े अवसर सृजित किए जा सकते हैं। अतः इसे कौशल विकास के साथ जोड़ा जाए। साथ ही, एम.एस.एम.ई. सेक्टर को भी इसके साथ जोड़ा जाए।

इस अवसर पर UP_Dy_CM डाॅ. दिनेश शर्मा, कौशल विकास मंत्री चेतन चैहान, मुख्य सचिव राजीव कुमार, मुख्य सचिव के आर्थिक सलाहकार के.वी. राजू, अपर मुख्य सचिव नियोजन, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री, एशियन डेवलपमेण्ट बैंक के कण्ट्री हेड कैनिची योको यामा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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