समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश/2047-समृधि का शताब्दी पर्व महाभियान

अब तक कुल 66,85,696 फीडबैक हुए प्राप्त, 52,98,579 सुझाव ग्रामीण क्षेत्र से एवं 13,87,121 सुझाव नगरीय क्षेत्र से हुए प्राप्त

समर्थ उत्तर प्रदेश विकसित उत्तर प्रदेश/2047-समृधि का शताब्दी पर्व महाभियान के अतर्गत दिनांक 30 अक्टूबर, 2025 तक 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्ध जनों द्वारा भ्रमण कर विभिन्न लक्षित समूहों छात्र, शिक्षक, व्यवसायी, उद्यमी, कृषक, स्वयं सेवी संगठन, श्रमिक संघटन, मीडिया एवं आम जनमानस के साथ विगत 8 वर्षों से प्रदेश की विकास यात्रा के संबंध में जानकारी दी गई तथा विकास हेतु रोड मैप पर चर्चा कर फीडबैक प्राप्त किया गया।

आम जनमानस की राय एवं सुझाव प्राप्त करने हेतु विकसित पोर्टल ेंउंतजीनजजंतचतंकमेीण्नचण्हवअण्पद पर अब तक कुल 66,85,696 फीडबैक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 52,98,579 सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से और 13,87,121 सुझाव नगरीय क्षेत्रों से आए हैं। इनमें 32,84,658 सुझाव आयु वर्ग 31 वर्ष से कम, 30,87,199 सुझाव 31-60 वर्ष के आयु वर्ग, तथा 3,13,844 सुझाव 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से प्राप्त हुए हैं। विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों का विवरण निम्न प्रकार हैरू कृषि 17,39,040, पशुधन एवं डेरी 2,66,286, इंडस्ट्री 2,42,635, आईटी एवं टेक 1,87,029, पर्यटन-1,57,866, ग्रामीण विकास-13,04,579, इन्फ्रा 60,005, संतुलित विकास-94,322, समाज कल्याण-5,15,307, नगरीय एवं स्वास्थ्य-4,54,148, शिक्षा क्षेत्र-15,38,196 तथा सुरक्षा सम्बंधित 1,26,289 सुझाव मिले हैं। जनपदों के अनुसार फीडबैक में टॉप पांच में जौनपुर (6,53,257), संभल (5.94,577), गाजीपुर (2,60,974), हरदोई (2,07,741) और प्रतापगढ़ (1.80.911) शामिल हैं। वहीं बॉटम पाँच में इटावा (21,307), ललितपुर (31.583), बलिया (33,095), गौतमबुद्ध नगर (33,494) और महोबा (30,020) से न्यूनतम फीडबैक प्राप्त हुए हैं।

बरेली से योगेश बाबू का सुझाव है कि ष्औद्योगिक विकास किसी भी देश की आर्थिक प्रगति की रीढ़ है। भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (डैडम्) रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। डैडम् को सस्ती ऋण सुविधा, तकनीकी प्रशिक्षण और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना ज़रूरी है। खादी एवं ग्रामोद्योग ग्रामीण आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। इसे आधुनिक मार्केटिंग, ई कॉमर्स और युवाओं की भागीदारी से पुनर्जीवित किया जा सकता है। वस्त्र उद्योग एवं हथकरघा भारत की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा है। इसके लिए डिज़ाइन नवाचार, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। खनन उद्योग औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति करता है। यहाँ पर्यावरण संतुलन, सुरक्षा और आधुनिक तकनीक का प्रयोग आवश्यक है। सुझाव है कि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर प्रशिक्षण, वित्त, नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर ध्यान दें। इससे संतुलित ओद्योगिक विकास और टिकाऊ अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा।

अमरोहा से विभोर जिंदल के अनुसार सघन स्वच्छता अभियानः विभाग द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियानों के तहत लगातार कई घंटों तक सफाई अभियान चलाए जाते हैं, जिसमें सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों जैसे महत्वपूर्ण स्थलों की विशेष सफाई की जाती है। जनभागीदारी को प्रोत्साहनः स्वच्छता के प्रयासों में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है, जिससे यह एक सामूहिक जिम्मेदारी बनती है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधनः शहरों को स्वच्छ रखने के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके तहत कूड़ाघरों का सुधार और अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान जेसी पहलें शामिल हैं। खुले में शौच से मुक्ति (व्क्थ्)रू विभाग ने कई शहरों ओर कस्बों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसके लिए सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया गया है।

हापुर से शिवा के अनुसार ‘पशु धन से जुड़े कुछ सुझाव यह हैं: 1. पशु चयनः अपनी जरूरतों और संसाधनों के अनुसार पशु चुनें, जैसे गाय, भैंस, बकरी, या मुर्गी। 2. पशु स्वास्थ्यः नियमित रूप से पशुओं की जांच करवाएं और टीकाकरण करवाएं। 3. पशु आहारः पौष्टिक आहार प्रदान करें और उनकी आहार संबंधी जरूरतों का ध्यान रखें। 4. पशुशालाः साफ-सुथरी और सुरक्षित पशुशाला बनाएं। 5. दूध और उत्पादः दूध और अन्य उत्पादों की गुणवत्ता का ध्यान रखें। दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री के लिए कुछ सुझाव यह हैंः 1. गुणवत्ता नियंत्रणः दूध और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता का ध्यान रखें। 2. बाजार अनुसंधानः अपने उत्पादों के लिए बाजार की मांग और प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण करें। 3. ब्रांडिंग और पैकेजिंगः आकर्षक ब्रांडिंग और पैकेजिंग से अपने उत्पादों को अलग बनाएं। 4. वितरण नेटवर्करू एक मजबूत वितरण नेटवर्क बनाएं। 5. ऑनलाइन बिक्रीः ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाएं।

इस महाभियान के सम्बन्ध में जनसामान्य को अवगत/जागरूक किये जाने हेतु नगर पालिका, नगर निगम, नगर पंचायत, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत, आदि पर विभिन्न बैठकों एवं सम्मेलनों/गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। अभी तक 215 नगर पालिकाओं में बैठकें एवं 228 नगर पालिकाओं में सम्मेलन/गोष्ठियाँ तथा 18 नगर निगमों में बैठकें एवं 18 नगर निगमों में सम्मेलन/गोष्ठियाँ आयोजित की गई हैं। इसी प्रकार 64 जिला पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 61 जिला पंचायतों में बैठकें, 557 नगर पंचायतों में बैठकें और 578 नगर पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियाँ एवं 780 क्षेत्र पंचायतों में सम्मेलन/गोष्ठियों और 783 क्षेत्र पंचायतों में बैठकें सम्पन्न हुई हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश की 51,012 ग्राम पंचायतों के स्तर पर भी बैठकों का सफल आयोजन किया गया है।

इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागों के बीच संवाद-सम्पर्क को और अधिक सशक्त किया गया है। मुख्यमंत्री की विजन ‘समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश /2047रू समृधि का शताब्दी पर्व महाभियान के अनुरूप प्राप्त सुझावों एवं फीडबैक के आधार पर विजन डाक्यूमेंट्स के निर्माण हेतु प्रदेश सरकार द्वारा यह प्रक्रिया निरंतर गतिशीलता के साथ जारी है। प्रदेश सरकार का यह प्रयास सामूहिक भागीदारी एवं समन्वित विकास को सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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