लखनऊ नगर निगम कार्यकारिणी बैठक स्थगित : महापौर की एक भी नहीं चलेगी, अगर ऐसा ईमानदार IAS हो नगर आयुक्त

नगर निगम कार्यकारिणी बैठक में महापौर सुषमा खर्कवाल ने अधिकारियों को लगाई फटकार, कई मुद्दों पर मांगा जवाब...तो नगर आयुक्त गौरव कुमार ने भी खोल दी पोल...कार्यकारिणी की बैठक 30 अक्टूबर तक के लिए स्थगित

लखनऊ। नगर निगम लखनऊ में शुक्रवार को माननीय कार्यकारिणी की बैठक महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में कार्यकारिणी उपाध्यक्ष चरणजीत गांधी, कार्यकारिणी सदस्यगण, नगर आयुक्त, समस्त अपर नगर आयुक्त, तथा नगर निगम और जलकल विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे। बैठक में नगर निगम से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई और कई अहम मुद्दों पर निर्णय लिए गए।

बैठक की शुरुआत में महापौर सुषमा खर्कवाल ने पूर्व संपन्न कार्यकारिणी समिति की सामान्य बैठक (दिनांक 22.8.2025) एवं स्थगित बैठक (दिनांक 23.8.2025) की कार्यवाही की पुष्टि पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुपालन न होने पर गहरी नाराज़गी जताई।

‼अमृतलाल नागर चौक का नामकरण न होने पर नाराज़गी

संकल्प संख्या 258 के अंतर्गत महापौर ने कहा कि कार्यकारिणी द्वारा सर्वसम्मति से पद्म विभूषण अमृतलाल नागर जी के नाम पर चौक चौराहे का नामकरण करने का निर्णय लिया गया था। बावजूद इसके, दो महीने बीत जाने के बाद भी नगर निगम ने चौराहे का नामकरण नहीं किया। महापौर ने इसे कार्यकारिणी की स्पष्ट अवहेलना बताते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया।

‼मृतक आश्रितों को नियुक्ति में लापरवाही पर फटकार

महापौर ने स्वास्थ्य विभाग में 46 मृतक आश्रितों की फाइलें लंबित होने पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि निर्देशों के बावजूद अब तक केवल 28 लोगों को नियुक्ति दी गई है जबकि 18 फाइलें अभी भी लंबित हैं। उन्होंने अधिकारियों को इस लापरवाही पर फटकार लगाते हुए शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए।

‼मार्ग प्रकाश विभाग में लाइट लगाने में लापरवाही

संकल्प संख्या 259 के अंतर्गत मार्ग प्रकाश विभाग में लाइट लगाने में हुई देरी पर भी महापौर ने नाराज़गी जताई। उन्होंने बताया कि दशहरा और दीपावली से पहले सभी 110 वार्डों में 25-25 लाइटें लगाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कार्य दिवाली तक भी पूरा नहीं हुआ। इस पर महापौर ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए अगली बैठक में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

साथ ही, उन्होंने नगर आयुक्त से प्रश्न किया कि टेंडर प्रक्रिया में वित्तीय पात्रता की असंगति क्यों है। 70 लाख के टेंडर में जहाँ 50 लाख की हैसियत मांगी गई, वहीं 6 करोड़ के टेंडर में केवल 30 लाख की ही हैसियत क्यों निर्धारित की गई। महापौर ने यह भी पूछा कि पीएमसी राजीव गिरधर की नियुक्ति किस आधार पर की गई।

‼टूटी सड़कों और पेचवर्क कार्य पर सवाल

शहर में टूटी सड़कों की समस्या पर चर्चा करते हुए माननीय महापौर ने कहा कि बजट की कमी का बहाना बनाकर पेचवर्क कार्य रोका गया है, जबकि उन्होंने स्वयं 50 लाख रुपये अपनी निधि से और माननीय पार्षदों की निधि से 5-5 लाख रुपये देने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद कार्य पूरा नहीं हुआ। उन्होंने अधिकारियों से जवाब मांगा और पेचवर्क के लिए अतिरिक्त 10 करोड़ रुपये जारी करने के निर्देश दिए।

‼कंप्यूटर ऑपरेटरों के वेतन में असमानता पर सवाल

संकल्प संख्या 261 के अंतर्गत कार्यदायी संस्था के माध्यम से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को समान वेतन देने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इस पर महापौर ने नाराज़गी जताई कि दो महीने बीत जाने के बावजूद इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने अगली बैठक में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

‼टैक्स रिवीजन को लेकर उठाया बड़ा सवाल

बैठक में माननीय महापौर सुषमा खर्कवाल ने टैक्स रिवीजन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जब माननीय कार्यकारिणी और माननीय सदन से यह प्रस्ताव पारित हो चुका है कि टैक्स रिवीजन अप्रैल 2022 से ही लागू किया जाए, तो फिर नागरिकों से साल 2002, 2008, 2014 और 2018 से संशोधित (रिवाइज) बिल क्यों वसूले जा रहे हैं।

‼महापौर ने अधिकारियों से कड़े शब्दों में कहा — “जब गलती आपकी है, तो जनता क्यों भुगते?”

उन्होंने इस विषय पर भी संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि टैक्स निर्धारण में किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो।

‼अधिवक्ताओं की फीस और पैनल पर सवाल

महापौर ने यह भी प्रश्न उठाया कि जब कोई अधिवक्ता नगर निगम के पैनल में है, तो उसे अलग से फीस क्यों दी जा रही है। साथ ही, कार्यकारिणी द्वारा जिस अधिवक्ता को हटाने का निर्णय लिया गया था, उसे अभी तक पैनल से हटाया क्यों नहीं गया है।

‼दो महत्वपूर्ण शासनादेशों पर चर्चा

बैठक में महापौर ने दो शासनादेशों (G.O.) को कार्यकारिणी के पटल पर रखा। इन आदेशों के अनुसार, अब जलकल विभाग के जीएम एवं नगर निगम के सिविल विभाग के मुख्य अभियंता सीधे नगर आयुक्त को रिपोर्ट करेंगे। महापौर ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इन शासनादेशों का पालन नगर निगम में तत्काल प्रभाव से किया जाए।

इसके साथ ही, उन्होंने अपर नगर आयुक्तों को जोनल कार्यों से अलग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक जोन की पूरी जिम्मेदारी संबंधित जोनल अधिकारी की होगी और अपर नगर आयुक्त का इसमें कोई दखल नहीं रहेगा।

‼बैठक स्थगित, 30 अक्टूबर को अगली बैठक

बैठक के अंत में महापौर सुषमा खर्कवाल ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक पूर्व बैठक की कार्यवाही की पुष्टि नहीं की जाती, तब तक किसी नए विषय पर चर्चा नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कार्यकारिणी की बैठक को 30 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया।

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