एलडीए प्रवर्तन जोन-1 ! क्या जोनल कर पाएगा ध्वस्तीकरण….या अभियंताओं ने कर ली डील….?

लखनऊ विकास प्राधिकरण का प्रवर्तन जोन 1 अवैध प्लाटिंग पर रोजाना बुलडोजर चलाकर अपनी पीठ थपथपा रहा है लेकिन जिन अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश हो चुका है. उनको क्षेत्र में तैनात अभियंता संरक्षण दिए हुए है. एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें अवैध निर्माणकर्ता एलडीए अफसरों से साठगांठ कर आदेश को ठंडे बास्ते में डालने के प्रयास में है.
ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हो जाने के बाद भी एलडीए प्रवर्तन जोन एक के अधिकारी आखिर किस घडी का इंतजार कर रहे हैं…और अब एलडीए का बुलडोजर कहाँ जंग खा रहा है? अभियंताओं की मिलीभगत से चलते अवैध निर्माण अभी भी सुरक्षित है क्योंकि जब अभियंता अपनी कृपा दृष्टि बनाये है तो फिर किस बात का डर है. जिसके कारण शिकायतकर्ता की बात नहीं सुनी जाती है.
सूत्रों से मिली जानकरी के मुताबिक लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने गोमती नगर के विराज खंड स्थित भूखण्ड संख्या-1/137 पर स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए अतिरिक्त निर्माण को अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया है।
एलडीए के अनुसार, धीरज पाल सिंह व अन्य द्वारा भूखण्ड संख्या-1/137 पर स्वीकृत मानचित्र (परमिट संख्या-20190318151256380, दिनांक 23.03.2019, वैधता 22.03.2024) के विपरीत भूतल, प्रथम तल एवं द्वितीय तल पर निर्माण कर लिया गया था। आरोप है कि द्वितीय तल पर एक कमरा और वॉटर टैंक/स्वीमिंग पूल का निर्माण बिना अनुमति कराया गया, जबकि मानचित्र में ऐसा प्रावधान नहीं था।

प्राधिकरण की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि विपक्षी ने सेटबैक को भी कवर्ड करते हुए निर्माण कार्य किया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण किए जाने से आस-पास के लोगों की जान-माल को खतरा हो सकता है।
लगातार नोटिस और सुनवाई के बावजूद भी विपक्षी द्वारा न तो शमनित भवन मानचित्र प्रस्तुत किया गया और न ही अवैध हिस्से को हटाया गया। एलडीए ने बताया कि विपक्षी को लगभग 55 तिथियों का अवसर दिया गया था, लेकिन उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया।
पत्रावली के परीक्षण के बाद एलडीए ने निर्णय लिया कि अतिरिक्त अनाधिकृत निर्माण एवं विकास कार्य ध्वस्तीकरण योग्य है। आदेश में कहा गया है कि विपक्षी स्वयं 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण को हटा लें, अन्यथा विकास प्राधिकरण द्वारा ध्वस्त कर दिया जाएगा और व्यय भार विपक्षी से वसूला जाएगा।
अब देखना है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण इन अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला पाएगा या सिर्फ खानापूर्ति करेगा? मामला अधिकारियों के संज्ञान में होने के बाद भी एक्शन मोड़ फेल हो जाता है.








