क्या वेबसाइट और यूट्यूब चैनल्स को निर्वाचन आयोग जारी कर रहा है पास? सूचना विभाग सूचीबद्ध वेबसाइट को भी नहीं दे रहा जारी पास

सूचना विभाग के प्रेस प्रभाग में बैठे अधिकारी और कर्मचारी निर्वाचन आयोग की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आपको बता दें कि वेब मीडिया में सूचीबद्ध वेबसाइट  होने के बाद भी निर्वाचन से जारी कवरेज पास पत्रकार को नहीं दिया जा रहा है। यह तानशाही प्रेस प्रभाग में बैठे अधिकारी और कर्मचारी कर रहे हैं और इधर उधर चक्कर कटवाते हैं।

सूत्रों के मुताबिक मानक को ताख़ पर रखकर कई वेबसाइट, यूट्यूब चैनल को प्रेस प्रभाग में बैठे अधिकारी ने आंख मूंदकर उनका नाम निर्वाचन भेज पास जारी कर दिया है।

अब सवाल है कि किन मानक के तहत कई संस्थान के पास सूचना विभाग ने जारी किये हैं। जानकारी मुताबिक यह सभी पोर्टल है? जबकि सूचना विभाग के प्रेस प्रभाग में बैठी प्रभारी शालनी तोमर का साफ कहना है कि निर्वाचन आयोग केवल प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ही पास जारी करेगा तो अब सवाल है कि इन सबके पास किसके संरक्षण जारी हो रहे हैं।

सूचना विभाग के प्रेस प्रभाग में तैनात प्रभारी शालनी तोमर को किसने बना दिया प्रभाग का प्रभारी? इन्हें ये तक जानकारी नहीं है कि कौन का संस्थान प्रिंट मीडिया है और कौन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया है?

इन अधिकारियों की लापरवाही के कारण बिना जानकारी किसी भी का लिस्ट में नाम डालकर निवाचन आयोग को भेज दिया और निर्वाचन ने पास जारी कर भेज दिया। उसके बाद ये अधिकारी अपनी मनमानी के आगे पत्रकार को पास नहीं दे रहे।

जब पास देना नहीं था तो क्यों भेजा निर्वाचन आयोग को लिस्ट में नाम?

क्या किसी का पास किसी दूसरे को जारी करने का चल रहा है सूचने में खेल? यह तो जांच का विभाग है और निर्वाचन आयोग को इस विषय पर ध्यान देना चाहिए।

निर्वाचन आयोग पत्रकारों के पास जारी कर रहा है और सूचना के प्रेस प्रभाग में तैनात अधिकारी अपनी मनमानी चला रहे हैं कि किसे पास देना है और किसे नहीं?

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