सरकार की अनदेखी, कविता सुनाकर बाढ़ पीड़ितों के जख्मों पर छिड़क रहे नमक ?

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने बाढ़ प्रभावित कुशीनगर, तमकुहीराज क्षेत्र में नाव पर बैठकर बाढ़ से हुई बर्बादी व डूबी फसलों का जायजा लिया और पीड़ित किसानों से मिलकर बातचीत की और उनका दुख जाना व हर संभव मदद और साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।

प्रदेश अध्यक्ष ने बर्बाद हुई फसलों जायजा लेने के बाद कहा कि बाढ़ से भयानक स्थिति हो चुकी है, लोगों की फसल पानी में डूबकर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाढ़ पीड़ितों की समय से मदद करने और उनका दर्द समझने के बजाए कविता पाठ ‘‘परवाह नही मंझधारो की, बाढ़ को तो आना जाना है, असहाय न समझिये साथी, हमे आपका साथ निभाना है“ पढ़कर बाढ़ पीड़ितों के जख्मो पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। आश्चर्य है कि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के उसी पूर्वाचल क्षेत्र से आते है जहां प्रत्येक वर्ष बाढ़ की विभिषिका भारी तबाही मचाती है, लेकिन साढे चार साल में भी कोई ठोस इंतजाम न कर अंजान बने रहे।  

कुशीनगर, तमकुहीराज क्षेत्र में नाव पर बैठकर बाढ़

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार दो माह से प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार को बाढ़ की विभिषिका और बाढ़ पीड़ितों के दर्द को लेकर आगाह कर रही थी, लेकिन प्रचार पसंद मुख्यमंत्री को होर्डिंग बैनर के झूठे प्रचार से ही फुर्सत नहीं थी कि वह कुछ ठोस इंतजाम करते, जब बाढ़ पीडितों के दर्द व  बहते आंसुओ को पोछने की जरूरत है, तब मुख्यमंत्री योगी संवेदनहीनता का परिचय देते हुए चुनावी पर्यटन और कविता पाठ कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू जी ने कहा कि प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ क्षेत्र के लाखों ग्रामीणों व कृषि को अपने आगोश में लीलती रही है, लेकिन भाजपा सरकार बचाव की तैयारियां करने के बजाय उत्सव मनाने में लगी रही, मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर शहर की स्थित भी बाढ़ से नरकीय बन चुकी है, प्रत्येक वर्ष गंगा, शारदा, घाँघरा नदियां सहित नेपाल की नदियों का पानी भी पूर्वांचल में भारी तबाही मचाता है। इसके बाद भी भाजपा की योगी सरकार जनता के धन से होर्डिंग्स-बैनर के जरिये झूठा प्रचार परोस कर सबको गुमराह करने तक सीमित है।   

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि बाढ़ पीड़ितों को शीघ्र से शीघ्र विशेष मुआवजा दें, ताकि पीड़ित किसान अपने सामान्य जीवन यापन की पटरी लौट सके।

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