मुझे धसने का शौक नहीं…धस जाती हूं अधिकारियों के कर्मों से… मैं सड़क!

राजधानी लखनऊ में सड़क धसने का सिलसिला रुक नहीं रहा है इसके पीछे अधिकारियों, कार्यदाई संस्थाओं और ठेकेदारों की बहुत बड़ी लापरवाही है।
ताजा मामला लखनऊ में लखनऊ यूनिवर्सिटी के सामने सड़क धसने का है जहां जलकल विभाग की घोर लापरवाही के चलते बड़ा हादसा होने से टल गया। सड़क धसने से पीडब्ल्यूडी के कार्य पर उंगली उठने लगी तभी इसी बीच वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि पाइप लाइन के रिसाव के कारण सड़क धस गई।
आपको बता दें कि जलकल विभाग के अधिकारी कार्यदाई संस्थाओं को काम देकर खुद मटरगस्ती में मस्त हो जाते हैं और कार्यदाई सस्थाएं अपने काम को लापरवाही पूर्वक करती हैं जिससे अन्य विभागों की थू थू होती है।
जलकल विभाग के अधिकारी इतने लापरवाह हो गए हैं कि उन्हें अपने किसी भी काम को करने में कोई रुचि नहीं है। अधिकारी केवल कार्यदाई संस्थाओं के भरोसे से अपना काम चला रहे हैं। अब हैरानी की बात है कि जानीमानी कंपनी को सीवर से संबंधित ठेका देने के के बाद भी शहर में बड़ी बड़ी लापरवाही आए दिन सामने आ रही हैं। इससे साफ होता है कि जिम्मेदार अफसर केवल खानापूर्ति में व्यस्त हैं।
अब बात की जाए जनता से जुड़ी सड़क की तो…सड़क (वह) यही कहती है कि “मुझे धसने का शौक नहीं…धस जाती हूं अधिकारियों के कर्मों से… मैं सड़क!” अर्थात् सड़क को जमीन में धसने का कोई शौक नहीं हैं लेकिन जलकल विभाग के गैर जिम्मेदार और लापरवाह अफसर के कारण में इनके कर्मों का शिकार हो जाती हूं।








