UPCM ने कृषि एवं मनरेगा अभिसरण कार्यशाला को सम्बोधित किया

उत्तर प्रदेश।
UPCM ने कार्यशाला का शुभारम्भ प्रज्ज्वलित और बाबा साहब डाॅ. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। कृषि राज्य मंत्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह (धुन्नी सिंह) ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

UPCM ने बाबा साहब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित कृषकों की आय दोगुना करने हेतु कृषि एवं मनरेगा अभिसरण कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कन्वर्जेन्स के माध्यम से कृषि कार्य में मनरेगा के उपयोग के उपायों पर विचार-विमर्श करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा 07 मुख्यमंत्रियों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति के सुझाव पर कृषि कार्यों में मनरेगा के उपयोग पर किसानों एवं अन्य सम्बन्धित व्यक्तियों और संस्थाओं की राय प्राप्त करने के लिए प्रदेश में चार कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। लखनऊ में इस प्रकार की पहली कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
UPCM ने कहा कि किसानों ने निरन्तर अपने पुरुषार्थ से देश की समृद्धि में योगदान दिया है। देश की खुशहाली और तरक्की का रास्ता किसान के खेत से होकर जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मनरेगा योजना की बड़ी भूमिका हो सकती है। इस दिशा में पहली बार वृहत्तर प्रयास हो रहा है।

UPCM ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि उत्पादन लागत घटाना, कृषि उत्पादन बढ़ाना और किसान को उसके कृषि उत्पाद का अधिकतम मूल्य दिलाना आवश्यक है। कृषि उत्पाद का अधिकतम मूल्य दिलाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा 14 जिन्सों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 50 से 150 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। कृषि लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में मनरेगा योजना इसमें कैसे उपयोगी साबित हो सकती है, हमें इस पर विचार करना है। मनरेगा के माध्यम से किसान की बुआई से पहले, फसल के दौरान तथा फसल कटाई के पश्चात सहायता की जा सकती है।
UPCM ने कहा कि वर्तमान में भी मनरेगा योजना के माध्यम से 260 कार्य किए जा सकते हैं। इसके माध्यम से 193 सामुदायिक कार्य तथा 67 व्यक्तिगत कार्य कराए जा सकते हैं। इससे लघु और सीमान्त किसानों को बड़ा लाभ हो सकता है। किन्तु जागरूकता के अभाव में इस योजना का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पाया। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर संगोष्ठी आदि के माध्यम से जागरूकता उत्पन्न की जानी चाहिए। ईमानदारी से प्रयास करके मनरेगा योजना के माध्यम से गरीब किसान को लाभान्वित करने के साथ ही व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।
UPCM ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के शुरुआती तीन वर्षों में कुछ हजार आवासों का निर्माण ही सम्भव हुआ। जबकि वर्तमान सरकार द्वारा एक वर्ष में 08 लाख 85 हजार आवास जरूरतमंदों को उपलब्ध कराए गए। इसमें मनरेगा योजना ने उपयोगी भूमिका निभायी। इस योजना के माध्यम से आवास के लाभार्थियों को 90 दिन की मजदूरी के रूप में 15 हजार रुपए तथा शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपए उपलब्ध कराए गए। इसी प्रकार आवारा पशुओं के लिए सभी नगर निगमों तथा सभी बड़े जनपदों में एक-एक बड़े गौसदन निर्माण में भी मनरेगा योजना का उपयोग किया गया।

UPCM ने कहा कि व्यापक जागरूकता, दृढ़ इच्छाशक्ति और शासन-प्रशासन की सक्रियता से जल संरक्षण में मनरेगा योजना का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। जल संरक्षण का कोई प्रयास न होने के कारण प्रदेश की कई नदियां मृतप्राय हो गईं। प्रदेश के 222 विकास खण्ड डार्कजोन में आ गए। इससे किसानों के उत्पादन पर व्यापक असर पड़ा। वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में मनरेगा के प्रभावी उपयोग के माध्यम से भदोही, बरेली, मिर्जापुर, चित्रकूट, आजमगढ़ आदि जनपदों में नदियों को पुनर्जीवित किया गया है।
UPCM ने कहा कि विगत वर्षों में शीतलहरी के दौरान एन.सी.आर. क्षेत्र सहित प्रदेश के कई जनपदों में स्माॅग के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी और जनजीवन प्रायः ठप हो गया। इसका मुख्य कारण किसानों का अपनी फसलों की कटाई के बाद उन्हें जला देना रहा। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान में मनरेगा योजना कैसे उपयोगी साबित हो सकती है, इस पर विचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा और जंगली पशुओं से खेती को सुरक्षित करने, सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने में मनरेगा की उपयोगिता पर भी विचार किया जाना चाहिए।
UPCM ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार किसानों के हित के लिए सतत प्रयत्नशील हैं। 86 लाख लघु एवं सीमान्त किसानों का 01 लाख रुपए तक का फसली ऋण माफ किया गया है। कृषि सिंचाई परियोजनाओं को तेजी के साथ लागू किया जा रहा है। आपदा की स्थिति में फसलों को हुई क्षति से किसान को फसल बीमा योजना के माध्यम से राहत दिलाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि खेती किसान के लिए लाभकारी होगी तो वह खेती से पलायन नहीं करेगा।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए ग्राम विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ. महेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश की आजादी में किसानों का बड़ा योगदान है। वर्तमान राज्य सरकार ने किसानों के हित में अनेक कदम उठाए हैं। इससे किसानों को बड़ा लाभ हुआ है और उनकी स्थिति में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने मनरेगा योजना का प्रभावी उपयोग किया है। इस वर्ष 20,000 तालाबों के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 9,728 तालाब बनाए गए हैं। लगभग 10,000 आंगनबाड़ी केन्द्रों का निर्माण भी कराया गया है। मनरेगा के अंतर्गत आधार आधारित भुगतान में प्रदेश को देश में पहला स्थान प्राप्त हुआ है।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त डाॅ. प्रभात कुमार ने कहा कि प्रदेश में 2.3 करोड़ कृषक परिवार हैं। इसमें से लगभग 92 प्रतिशत लघु एवं सीमान्त किसान हैं। इसी प्रकार प्रदेश में लगभग 02 करोड़ मजदूर हैं। कृषि कार्यों में मनरेगा योजना के उपयोग के सम्बन्ध में किसानों से सुझाव प्राप्त करने के लिए प्रदेश के चार स्थानों पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। आज यहां आयोजित कार्यशाला में पांच मण्डलों के 25 जिलों के किसान, मजदूर और कृषि से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं। इनका फीडबैक मनरेगा योजना को और उपयोगी बनाने में सहायक होगा।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अनुराग श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद, मण्डलायुक्त लखनऊ अनिल गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।








