UPCM ने कहा अयोध्या में रामलीला का निरन्तर आयोजन सुनिश्चित किया जाए

उत्तर प्रदेश।
UPCM ने कहा कि अयोध्या में रामलीला का निरन्तर आयोजन सुनिश्चित किया जाए। यह किसी भी हाल में रुकने न पाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में होने वाली रामलीलाओं को बढ़ावा देने के लिए उन्हें सभी प्रकार का सहयोग प्रदान करते हुए इन्हें अनुदान भी दिया जाए। उन्होंने श्रीरामचरितमानस को कंठस्थ कराने के लिए पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

UPCM ने शास्त्री भवन में अयोध्या शोध संस्थान के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा रामलीला के शोध, सर्वेक्षण और प्रदर्शन हेतु उपलब्ध कराए गए अनुदान की कार्य योजना के प्रस्तुतिकरण के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अयोध्या में आयोजित होने वाले ‘दीपोत्सव’ में प्रत्येक वर्ष विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया जाए। उन्हांने कहा कि अयोध्या में ‘दीपोत्सव’ के साथ ही ‘रामलीला उत्सव’ का आयोजन भी किया जाएगा। इसके अलावा, रामलीला के कलाकारों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया के किन नगरों के नाम भगवान श्रीराम के नाम पर हैं, इस पर तथ्यपरक शोध किया जाए।

UPCM एनेक्सी में अयोध्या में रामलीला के प्रस्तुतिकरण, शोध और सर्वेक्षण योजना के विषय में जानकारी लेते हुए
UPCM एनेक्सी में अयोध्या में रामलीला के प्रस्तुतिकरण, शोध और सर्वेक्षण योजना के विषय में जानकारी लेते हुए

प्रस्तुतिकरण के दौरान UPCM को रामलीला के प्रस्तुतिकरण, शोध और सर्वेक्षण योजना के विषय में जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा रामलीला के शोध, सर्वेक्षण और प्रदर्शन हेतु 50 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है।

इसके तहत थाईलैण्ड की रामलीला (खोन), सूरीनाम, त्रिनिडाड की मैदानी रामलीलाओं के शोध, सर्वेक्षण हेतु 05 लाख रु., इण्डोनेशिया में हिन्दू विश्वविद्यालय, जकार्ता द्वारा रामलीलाओं के शोध, सर्वेक्षण हेतु 05 लाख रुपए, सूरीनाम, त्रिनिडाड में रामलीलाओं की प्रस्तुति हेतु 15 लाख रु., कैलीफोर्निया के माउण्ट मैडोना स्कूल में विगत 40 वर्षों से की जा रही रामलीला के दस्तावेजीकरण, शोध और सर्वेक्षण हेतु 05 लाख रुपए, उत्तर प्रदेश/देश/विश्व के विभिन्न स्कूलों में पारम्परिक रामलीलाओं की प्रस्तुति तथा रामलीलाओं की प्रदर्शनी हेतु 13 लाख रु., उत्तर प्रदेश में मलेशिया की रामलीला/रामायण की प्रस्तुति और विभिन्न देशों की रामलीलाओं की प्रदर्शनी हेतु 03 लाख रु., माॅस्को के रामलीला कलाकार पद्मश्री गेन्नादी पिचनिकोव के जीवनवृत्त पर आधारित वीडियो फोटो हेतु 02 लाख रु. और प्रकाशन हेतु 02 लाख रु. की धनराशि स्वीकृत की गई है।

UPCM को वर्तमान वित्तीय वर्ष की प्रस्तावित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विस्तृत जानकारी देते हुए बताया गया कि इसके तहत प्रदेश में लीला गुरुकुलों की स्थापना, रामलीला का एक मानक पाठ तैयार करना (जिसके द्वारा 07 दिन में सम्पूर्ण रामलीला का मंचन किया जा सके), रामलीलाओं के प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था और स्कूलों व विश्वविद्यालयों में समवर्ती पाठ्यक्रमों, क्रियाकलापों में रामलीला का मंचन शामिल हैं। इसके अलावा, विद्यार्थियों में रामलीला के प्रति रुझान उत्पन्न करने की विशेष योजनाओं, जिनमें प्रतियोगिता और पुरस्कार योजना तथा विदेश भ्रमण की योजना, जिसमें रामलीला से सम्बन्धित देशों का भ्रमण कराते हुए विदेशी रामलीलाओं को अवलोकित कराना भी शामिल है।

प्रस्तुतिकरण के दौरान UPCM को प्रदेश की मैदानी रामलीलाओं के संरक्षण, प्रोत्साहन की योजना के विषय में भी जानकारी दी गई। इनमें पूंजीगत एकमुश्त अनुदान योजना, वेशभूषा, परदे, वाद्ययंत्रों आदि के क्रय हेतु एकमुश्त अनुदान योजना और मैदानी रामलीलाओं का रामलीला सर्किट बनाकर पर्यटकों और श्रद्धालुओं हेतु विशेष योजनाएं सम्मिलित हैं।

इस अवसर पर UPCM को ‘रामलीला की विश्व यात्रा (यूनेस्को द्वारा वर्ष 2005 में घोषित विश्व की अमूर्त विरासत)’ पुस्तक भेंट की गई।

प्रस्तुतिकरण के दौरान संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य मंत्री लक्ष्मी नारायण चैधरी, प्रमुख सचिव सूचना और पर्यटन अवनीश कुमार अवस्थी, अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डाॅ. योगेन्द्र प्रताप सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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