एलडीएः जनता अदालत में आये 34 प्रकरणों में से 9 का मौके पर हुआ निस्तारण

लखनऊ विकास प्राधिकरण में गुरूवार को जनता अदालत/प्राधिकरण दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान नामांतरण, फ्री-होल्ड, रजिस्ट्री व अवैध निर्माण आदि से सम्बंधित कुल 34 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 09 प्रकरणों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। वहीं, शेष प्रकरणों के निस्तारण के सम्बंध में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ0 इन्द्रमणि त्रिपाठी द्वारा समय-सीमा निर्धारित करते हुए अधिकारियों को कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया।
उप सचिव माधवेश कुमार ने बताया कि प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ0 इन्द्रमणि त्रिपाठी द्वारा जन सामान्य एवं आवंटियों की समस्याओं एवं उनके कार्यों को त्वरित गति से शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित किये जाने के लिए दिये गए निर्देशों के क्रम में प्राधिकरण भवन के कमेटी हॉल में “प्राधिकरण दिवस/जनता अदालत“ का आयोजन किया गया। इस मौके पर उपाध्यक्ष महोदय द्वारा जनता अदालत में उपस्थित होकर जन सामान्य की समस्याओं को विस्तारपूर्वक सुना गया।
जनता अदालत में पहुंचे बसन्तकुंज योजना के सेक्टर-डी निवासी वीरेन्द्र सिंह व मंजूलता कश्यप ने प्रार्थना पत्र दिया कि विद्युत लाइन उर्जीकृत न होने के कारण विद्युत विभाग द्वारा नया कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है। इस पर उपाध्यक्ष ने अधिशासी अभियंता (वि0/यां0) मनोज सागर को स्थल निरीक्षण करके एक सप्ताह में कार्यवाही सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये। इस क्रम में पुराना हैदरगंज निवासी राम विलास श्रीवास्तव ने प्रार्थना पत्र दिया कि बिजनौर के ग्राम-मौदा में गाटा संख्या-152 पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से रो-हाउस भवनों का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके विरूद्ध विहित प्राधिकारी न्यायालय द्वारा वाद भी योजित किया गया है। उपाध्यक्ष ने प्रवर्तन जोन-3 के जोनल अधिकारी देवांश त्रिवेदी से उक्त प्रकरण में आख्या तलब करते हुए तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
इस क्रम में गोण्डा के करनैलगंज निवासी वकील अहमद ने देवपुर पारा के ई0डब्ल्यू0एस0 भवन के रिफंड के सम्बंध में प्रार्थना पत्र दिया। जिस पर उपाध्यक्ष ने सहायक लेखाधिकारी विनोद श्रीवास्तव को मौके पर बुलाकर आवंटी को तत्काल रिफंड दिलाने के निर्देश दिये। वहीं, जनता अदालत में आये पेपरमिल कालोनी निवासी विजय गुप्ता ने प्रार्थना पत्र देते हुए बताया कि उनके पिता ने वर्ष 1960 में भवन संख्या-सी-5/10 आवंटित कराया था, तब से वह लोग नियमित रूप से किराया जमा कराकर उक्त भवन में निवास कर रहे हैं। अब वह समस्त देय शुल्क जमा कराके भवन की रजिस्ट्री कराना चाहते हैं। इस पर उपाध्यक्ष ने सम्बंधित अधिकारियों से प्रकरण में आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिये।








