नेताओं से ज्यादा दगाबाज हैं एलडीए के अफसर

रिपोर्ट : ऋषि कुमार शर्मा।

लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी नेताओं से भी ज्यादा दगाबाज हैं। ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि राजधानी के प्रत्येक प्रवर्तन जोन में अवैध निर्माण और प्लाटिंग जमकर होने के बाद भी अधिकारी कोई एक्शन नहीं लेते। खानापूर्ति हेतु केवल नोटिस पर नोटिस काटकर थमा देते हैं। बाद में यही नोटिस को मोहरा बनाकर निर्माणकर्ता अवैध निर्माण को पूरा कर लेता।

बात कहां आकर है फंसती?

बात आकर तब फंसती है जब डीलिंग सही नहीं होती। मतलब साफ है कि जब अवैध निर्माण बनता है तब कोई एक्शन नहीं लिया जाता। जब बनकर तैयार हो जाता है तो केवल हवा हवाई कार्यवाही करते हुए सीलिंग कर देते हैं।

आखिर क्षेत्र में अधिकारियों के होने के बाद कैसे बन जाते है अवैध निर्माण/रो हाउसेस

अब सवाल यह है कि प्रवर्तन जोन में कहीं एक सुपरवाइजर है तो कहीं 2, तो कहीं 2-2 अवर अभियंता और उसके ऊपर सहायक अभियंता। उसके ऊपर जोनल अधिकारी बावजूद इसके इतने अधिकारी होने के बाद भी अवैध निर्माण बनकर खड़ा कैसे हो जाता है? आखिर जब खड़ा हो जाता है तो एलडीए के अधिकारी सीलिंग करने क्यों जाते हैं? इसके पीछे कुछ तो मंशा जरूर होगी..ये तो राम जाने.

वैसे तो नेताओं को दगाबाज कहा जाता है लेकिन एलडीए के अफसर कई ज्यादा दगाबाज हैं क्योंकि एक जोनल के बदलने के बाद दूसरा जोनल आते ही अपनी शनि की नजर पुराने अवैध निर्माण पर डालने लगता है जिससे निर्माणकर्ता भी धराशाही हो जाता है। नेता तो पार्टी बदलते है लेकिन एलडीए के अधिकारी गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं। उन्हें तो केवल राजस्व से मतलब वो भी खुद के।

अवैध निर्माण को पूरा होने से पहले भी सील किया जा सकता है तो निर्माण के पूरा होने के बाद कौन सी आफत के मारे बड़ी कार्यवाही करके जंग लगा बुलडोजर चलाते हैं।

सीलिंग के बाद डीलिंग से मिलती है अवैध निर्माण को राहत

यह खेल बड़ा लंबा है लेकिन इसके धुरंधर अवर अभियंता और जोनल अधिकारी इसे बड़ी ही बखूबी निभा रहे हैं। सीलिंग के बाद अधिकारियों को डीलिंग और कंपाउंडिंग के नाम पर रिपोर्ट लगाने में भी मूलधन के साथ ब्याज देना पड़ता है। हाल ही में सीलिंग के निर्माण को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण पूरा होने पर ही ये एलडीए के अफसर अपनी कुंभकर्णी नींद से क्यों जागते हैं? पहले केवल हवाई नोटिस क्यों देते हैं यह सोचनीय विषय है?

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