सचिवालय में संविदाकर्मी महिला के यौन उत्पीड़न की कांग्रेस ने बताया शर्मनाक

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता शुचि विश्वास श्रीवास्तव ने सीएम योगी आदित्यनाथ के अधीन सचिवाल में संविदाकर्मी महिला के यौन उत्पीड़न को शर्मनाक बताते हुए कहा है कि यह प्रदेश में महिला उत्पीड़न की बानगी है। उन्होंने कहा कि बात-बात में ‘यत्र नारी पूज्यंते, रमंते तत्र देवता’ को भारत का मूल विचार बताने वाली बीजेपी की सरकार में मुख्यमंत्री दफ़्तर में भी महिला सुरक्षित नहीं है।

उन्होंने कहा कि यूपी में सरकार के संरक्षण में खुलेआम महिलाओं पर अत्याचार होते हैं। अराजकता और उत्पीड़न चरम पर है। एनसीआरबी के आकड़े इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सरकार को शर्मिंदा होना चाहिए की मुख्यमंत्री की नाक के नीचे सचिवालय में एक संविदा कर्मी को एफआईआर कराने के 12 दिन बाद भी न्याय नहीं मिला और आख़िरकार उसे अपने सम्मान की परवाह न करते हुए उत्पीड़न का वीडियो वायरल करना पड़ा। इसके बावजूद सरकार के कान पर जूँ नहीं रेंग रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हर कार्यालय में विशाखा कमेटी होनी चाहिए। अगर वह कमेटी काम कर रही होती तो पीड़ित महिला को गुमनाम रहकर न्याय पाने का रास्ता मिलता, लेकिन योगी सरकार को नियम-कानून की कोई परवाह नहीं है।

उन्होंने कहा कि हर अगली घटना से पिछली घटना और ज्यादा भयावह होती है। उन्नाव रेप पीड़िता ने मुख्यमंत्री को टैग करके सौ से ज्यादा ट्वीट किये और मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। न्याय पाने की आस में उत्तर प्रदेश की बेटियां प्रतिदिन भयावह मानसिक उत्पीड़न से गुजरती है। चिंमयानंद प्रकरण में पीड़िता को अवैध वसूली का आरोपी तक बना दिया। हाथरथ पीड़िता को सनातन परंपरा के विपरित रात में पेट्रोल डालकर जला दिया गया था।  

शुचि विश्वास ने कहा कि नवरात्रि के महानिशा पूजन, कन्याभोज एवं कन्यास्तुति कर भगवती की आरधना करने का प्रपंच और आधी आबादी के प्रति मुख्यमंत्री की उपेक्षा, उनके आध्यामिक व्यक्तित्व के असली चेहरा बताता है। कांग्रेस की महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गाँधी जी ने ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ का नारा देकर यूपी की महिलाओं को जो शक्ति दी है, वह योगी राज के अंत की शुरुआत है।

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