सनातन धर्म की गौरवशाली परम्परा में नाथ सम्प्रदाय का विशिष्ट योगदान : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री जनपद झज्जर, हरियाणा में मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा तथा आठ मान भण्डारा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के सनातन धर्म की परम्परा दुनिया की सबसे प्राचीन परम्परा है। यह एक ऐसी परम्परा है, जिसने मानव को मानव बनाने तथा चराचर जगत के कल्याण का मार्ग अपनी सिद्धि एवं साधना के माध्यम से प्रशस्त किया है। भारत की सनातन परम्परा विभिन्न उपासना विधियों से पंथ और सम्प्रदाय के रूप में सनातन धर्म के अलग-अलग दर्शन तथा उससे उत्पन्न ज्ञान की नई पद्धतियों का आधार रहा है।
मुख्यमंत्री ने जनपद झज्जर, हरियाणा के ग्राम कबलाना में सिद्ध योगी बाबा पालनाथ के धूना पर मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा तथा आठ मान भण्डारा कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने सभी गुरुओं को नमस्कार करते हुए ‘नमः गुरुभ्यो गुरुपादुकाभ्यो, नमः शिवेंद्राय शिवपादुकाभ्यः, नमो गोरक्षाय मच्छेंद्रपादुकाभ्यो, नमो नमस्ते गुरु पादुकाभ्यः’ अपना सम्बोधन की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने सुख-शांति के माहौल तथा लोगों की खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि आज यहां सिद्ध शिरोमणि बाबा मत्स्यनाथ जी महाराज, बाबा पालनाथ जी महाराज व उनके गुरु भाई तथा अन्य सिद्धों व योगेश्वरों की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन परम्परा दर्शन एवं ज्ञान की विशिष्ट पद्धति को आगे बढ़ाने वाली तथा समाज का मार्गदर्शन करने वाली है। यह व्यक्ति की प्रकृति के अनुरूप साधना पद्धतियों का विकास और दर्शन देने वाली पद्धति रही है। सनातन धर्म की गौरवशाली परम्परा में नाथ सम्प्रदाय का विशिष्ट योगदान है। इस परम्परा की शुरुआत आदिनाथ भगवान शिव से हुई है। आज यहां पूज्य संतों, सिद्धों, योगेश्वरों की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा के साथ शिव परिवार की प्राण-प्रतिष्ठा भी हो रही है। आदिनाथ भगवान शिव की उपासना एक निराकार ब्रह्म के प्रतीक के रूप में सम्पूर्ण भारत में उत्तर से दक्षिण तथा पूरब से पश्चिम तक देखने को मिलती है। यह कार्यक्रम सनातन धर्म तथा नाथ सम्प्रदाय के सिद्धों एवं योगेश्वरों की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश में विराजमान भगवान शिव तथा रामेश्वरम में विराजमान भगवान रामेश्वर शिव के ही रूप हैं। यह भारत की एकात्मता का प्रदर्शन करते हैं। सनातन धर्म की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के लिए नाथ सम्प्रदाय के योगियों ने 12 अलग-अलग उपपंथों द्वारा व्यापक पैमाने पर सिद्ध और योगेश्वरों के माध्यम से अलग-अलग कालखण्डों में विभिन्न तरीकों से आमजन तक सर्वसुलभ करने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भण्डारा कार्यक्रम नाथ सम्प्रदाय की परम्परा में अपने इष्ट को स्मरण करने, कृतज्ञता ज्ञापित करने तथा आपसी मिलन का अवसर प्रदान करता है। यह कार्यक्रम महाकुम्भ प्रयागराज के भव्य एवं दिव्य कार्यक्रम का स्मरण करा रहा है। यहां आकर आनन्द की अनुभूति हो रही है। भण्डारे में इतना बड़ा जनसैलाब अद्भुत, अविस्मरणीय एवं अभिनन्दनीय है। यहां आए ज्यादातर योगेश्वर एकान्त में वास करने वाले हैं। यह एकान्तिक साधना में सदैव लीन रहते हैं। इनकी एकान्तिक साधना यदा-कदा ही सार्वजनिक मंच तथा कार्यक्रमों पर देखने को मिलती है। इन संतों से बहुत सीखा जा सकता है। इसके अन्तर्गत योग, ध्यान एवं प्राणायाम के माध्यम से स्वस्थ बनकर स्वस्थ भारत एवं विकसित भारत के निर्माण में हम अपना योगदान दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 09 नवम्बर, 2019 को मा0 उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि अयोध्या में जहां श्रीरामलला विराजमान हैं, वही प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि है। इस प्रकार अयोध्या धाम में श्रीरामलला के मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में मंदिर के निर्माण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया था। गत वर्ष जब अयोध्या धाम में भगवान श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम भी सम्पन्न हुआ, तब सम्पूर्ण विश्व ने भारत का गौरव तथा अयोध्या धाम की अलौकिक छटा को देखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ अर्थात जहाँ धर्म है, वहाँ विजय होती है। जब हम एक साथ सोचते, बोलते तथा चलते हैं, तो उसके परिणामस्वरूप सनातन की विजय देखने को मिलती है। 500 वर्षों के पश्चात विगत 25 नवम्बर को श्री अयोध्या धाम में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर के शिखर पर प्रधानमंत्री जी के कर-कमलों द्वारा भगवा धर्म ध्वज को फहराया गया। यहां भी मंदिर परिसर में प्रत्येक स्थान पर भगवा ध्वज लगाया गया है। यह ध्वज सनातन धर्म की परम्परा का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह धर्म ध्वजा केवल वस्त्र नहीं, बल्कि आसमान की ऊंचाइयों को छूने वाला ध्वज है। यह प्रत्येक सम-विषम परिस्थितियों में सनातन धर्म के मूल्यों एवं आदर्शों की पताका को सदैव ऊंचा बनाकर रखेगा। यह धर्म ध्वज सनातन के गौरव का प्रतीक बन गया है। यह भगवा धर्म ध्वज विश्व को संदेश दे रहा है कि सत्य और धर्म का मार्ग सदैव ऊंचा रहता है। इसे कोई झुका नहीं सकता है। धर्म की सदा ही जय होती है। हमें बिना विचलित हुए धर्म के पथ का अनुसरण करने के लिए तैयार रहना होगा। एकजुटता का यही संदेश हमारे संतगण भण्डारा कार्यक्रम के माध्यम से देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में डबल इंजन सरकार है। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा नित नये प्रतिमान को स्थापित कर विकास के पथ पर लगातार आगे बढ़ रहा है। स्वर्ण युग हमें चैतन्य और सतर्क रहने की प्रेरणा देता है। भारत में जब स्वर्ण युग आया था, तब विदेशी हमले होने प्रारम्भ हो गए थे। हमें पुनः सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह हमले दो तरह से हो सकते हैं। एक हमला धर्मांतरण के माध्यम से तथा दूसरा नशे के माध्यम से हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में कोई भी सनातन विरोधी कार्य स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। भारत और विश्व मानवता की रक्षा करने के लिए सनातन धर्म की रक्षा आवश्यक है। यदि विश्व में चराचर जगत की रक्षा करनी है, तो सनातन की रक्षा करनी होगी। यह तभी सम्भव है, जब हम सभी मिलकर एक रहेंगे। हमें बंटना नहीं है, बटेंगे तो कटेंगे। जाति, भाषा, क्षेत्र व तुष्टिकरण के नाम पर भी हमें बंटना नहीं है। एकजुट रहकर सनातन धर्म की ध्वज पताका को हर घर पर लहराना होगा, जिस प्रकार अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि में धर्म ध्वजा फहरा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा, नाश का कारण है। यह व्यक्ति के सामर्थ्य को नष्ट करता है। हमें हर हाल में अपने युवाओं को हर प्रकार के नशे से दूर रखना होगा। हमारा दुश्मन इस फिराक में है कि भारत में नशे का कारोबार फैल जाए। हमें जाने-अनजाने में इसकी चपेट में नहीं आना है। उन्होंने कहा कि हमारे भण्डारा कार्यक्रमों व अन्य धार्मिक आयोजनों में धर्मान्तरण, लव-जिहाद, नशे के खिलाफ हर हाल में आवाज उठनी चाहिए, क्योंकि यह सभी हमारे वर्तमान को खोखला कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। हमें इनके खिलाफ एक बड़े अभियान को लेकर चलना होगा। सारंगी की ध्वनि नाथ सम्प्रदाय का प्रतीक रही है। नाथ सम्प्रदाय से जुड़े लोग सारंगी बजाकर गांव-गांव में जन जागरण का कार्य करते आए हैं। लोगों को समाज के अनुरूप आचरण करने, चलने व संकट से सावधान करना इसका उद्देश्य था।
कार्यक्रम को राजस्थान विधान सभा सदस्य महन्त बालकनाथ ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर साधु-संत एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।








