सीएम योगी ने ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ का किया शुभारम्भ, लाभार्थियों को चेक और टूलकिट वितरित किए

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अन्तर्गत 10 दिन का निःशुल्क प्रशिक्षण, प्रशिक्षण अवधि में 5,000 रु0 का मानदेय तथा प्रशिक्षण के उपरान्त 15,000 रु0 तक की टूलकिट उपलब्ध करायी जा रही

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक ओर आज सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयन्ती है, वहीं दूसरी ओर नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिन भी है। कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों के सम्मान का यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री की प्रेरणा और मार्गदर्शन का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा जयन्ती के अवसर पर प्रदेशवासियों, कारीगरों, हस्तशिल्पियों एवं उद्यमियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर भी उन्हें प्रदेशवासियों की ओर से बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।


मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा जयन्ती के अवसर पर विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अन्तर्गत ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ तथा टूलकिट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने मार्जिन मनी ऋण पोर्टल तथा ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ का शुभारम्भ कर प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक और टूलकिट वितरित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के समक्ष कॉरपोरेट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एम0ओ0यू0 का आदान-प्रदान किया गया। कार्यक्रम में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ने अपनी अद्भुत शिल्पकला के माध्यम से समाज के कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भगवान शिव के त्रिशूल, इन्द्र के वज्र और भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा हैं। भगवान श्रीराम की लंका विजय के लिए समुद्र पर सेतु बन्ध के निर्माण में भगवान विश्वकर्मा के मानस पुत्र नल-नील का योगदान था, जिन्होंने समुद्र पर सेतु निर्माण में अपनी अद्भुत शिल्पकला का परिचय दिया।यहां 100 योजन तक समुद्र में पुल का निर्माण किया गया था।

आज देश और प्रदेश के प्रत्येक उद्योग, व्यवसाय एवं कारीगरी से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हुए विश्वकर्मा पूजन करते हैं। हमारे कारीगर एवं हस्तशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की उसी महान शिल्प परम्परा के प्रतिनिधि हैं। इनकी कला, परिश्रम और कौशल से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है तथा रोजगार के नए अवसरों का सृजन होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 07-08 वर्षों में प्रदेश में 06 लाख से अधिक हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण दिया गया है। सरकार का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि कारीगर को प्रशिक्षण के साथ आर्थिक सहयोग, आधुनिक तकनीक, टूलकिट, बाजार और बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।

भारत दुनिया में विकसित तब था, जब भारत का कारीगर उद्यमी था और हस्तशिल्पी आत्मनिर्भर था। पिछली सरकारों के समय कारीगरों को बाजार, बैंकिंग व्यवस्था, डिजाइन और आधुनिक तकनीक की सुविधाओं से दूर कर दिया गया। परिणामस्वरूप जो कारीगर कभी उद्यमी हुआ करता था, वह धीरे-धीरे श्रमिक बनने और पलायन के लिए मजबूर हुआ। वर्ष 2017 में प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सम्भालने के बाद उन्होंने प्रदेश के कारीगरों और हस्तशिल्पियों की स्थिति को करीब से देखा। अनेक कारीगर हताश और निराश थे तथा रोजगार के अभाव में पलायन कर रहे थे। सरकार ने कारीगरों को सम्मान, सुरक्षा, प्रशिक्षण, पूँजी और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओ0डी0ओ0पी0) योजना लागू की गई। इसके बाद वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई। परम्परागत कारीगर प्रतिदिन काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। ऐसे में केवल प्रशिक्षण देने से उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसलिए सरकार ने प्रशिक्षण के साथ मानदेय, प्रशिक्षण पूरा होने पर टूलकिट और इसके बाद बैंक ऋण से जोड़ने की व्यवस्था की।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अन्तर्गत 10 दिन का निःशुल्क प्रशिक्षण, प्रशिक्षण अवधि में 5,000 रुपये का मानदेय तथा प्रशिक्षण के उपरान्त 15,000 रुपये तक की टूलकिट उपलब्ध करायी जा रही है। प्रशिक्षण में कारीगरों की पारम्परिक कला को संरक्षित रखते हुए बाजार और वर्तमान माँग के अनुरूप आधुनिक तकनीक एवं कौशल से भी जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के प्रारम्भिक चरण में 11 पारम्परिक ट्रेडों को शामिल किया गया था। इनमें बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी सहित अन्य पारम्परिक कार्य शामिल हैं। सरकार ने इसमें 05 नए पारम्परिक ट्रेड भी जोड़े हैं। इनमें मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाला माली, भड़भूजा/लाई-भुजा तथा मछुआरा जैसे कार्यों को शामिल किया गया है। जो लोग लम्बे समय से दूसरों के लिए रोजगार और आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराते रहे, सरकार अब उनके साथ खड़ी है और उन्हें आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रही है।

आज का युवा अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुसार स्वरोजगार का क्षेत्र चुनना चाहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए युवाओं एवं कारीगरों को आधुनिक ट्रेडों से जोड़ा गया है। इनमें मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम रिपेयर, विद्युत उपकरणों की मरम्मत, प्लम्बरिंग, कम्प्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर आदि शामिल हैं। कुल 25 ट्रेडों के माध्यम से प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन योजनाओं का मूल उद्देश्य यही है कि प्रदेश का कारीगर और हस्तशिल्पी केवल श्रमिक बनकर न रहे, बल्कि स्वयं उद्यमी बने और दूसरों को भी रोजगार देने में सक्षम हो।

सरकार कारीगरों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर उनके उद्यम को विस्तार देने का कार्य कर रही है। कारीगरों के लिए ऋण की सीमा 10 लाख रुपये तक की गई है। साथ ही, 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की सुविधा भी उपलब्ध है। सरकार का उद्देश्य है कि कारीगर को ऋण प्राप्त करने के लिए अपनी सम्पत्ति या अन्य प्रकार की गारण्टी देने की आवश्यकता न पड़े। सरकार उसके साथ खड़ी है और उसे आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रही है।

वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश, देश के बड़े राज्यों में होने के बावजूद आर्थिक दृष्टि से पिछड़े राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था। प्रदेश के पास सबसे उर्वर भूमि, पर्याप्त जल संसाधन और बड़ी युवा आबादी होने के बावजूद अपेक्षित आर्थिक विकास नहीं हो पा रहा था। कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को सम्मान एवं सहयोग देने तथा उनके लिए बेहतर वातावरण तैयार करने का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ रहा है। पहले जिस प्रदेश को बीमारू कहा जाता था, आज देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उत्तर प्रदेश की भी गिनती होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की समस्या संसाधनों की कमी नहीं थी, बल्कि पिछली व्यवस्था में कारीगरों और उद्यमियों के प्रति सकारात्मक सोच का अभाव था। वर्तमान सरकार ने इस मानसिकता को बदलते हुए कारीगरों को सम्मान, अवसर और बाजार उपलब्ध कराने का काम किया है।

25 से 29 सितम्बर, 2026 तक ग्रेटर नोएडा स्थित इण्डिया एक्सपो सेण्टर में उत्तर प्रदेश इण्टरनेशनल ट्रेड शो आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय बायर्स के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रेड शो में 2,500 से अधिक एग्जिबिटर्स भाग लेंगे तथा 650 से अधिक विदेशी खरीदार भी इसमें शामिल होंगे। इससे प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध होगा और कारीगरों एवं उद्यमियों के उत्पादों के लिए बड़े स्तर पर ऑर्डर मिलने की सम्भावना बनेगी। उन्होंने अनुमान व्यक्त किया कि ट्रेड शो में लगभग 12,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार हो सकता है। इस प्रकार प्राप्त होने वाला व्यापार सीधे प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देगा।

आगामी 25 से 29 सितम्बर तक प्रत्येक जनपद में टूलकिट वितरण एवं ऋण उपलब्ध कराने का अभियान चलाया जाएगा। कारीगरों को उनकी आवश्यकता के अनुसार बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। किसी को 08 लाख रुपये, किसी को 02 लाख रुपये और किसी को 01 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि कारीगर को ऋण के लिए गारण्टी न देनी पड़े और ब्याज का भार भी उस पर न आए। बैंक कारीगरों को ऋण उपलब्ध कराएं और सरकार आवश्यक सहयोग प्रदान करे।

प्रदेश में उद्यमिता को बढ़ावा देने का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में 96 लाख एम0एस0एम0ई0 इकाइयाँ स्थापित हैं। इनमें लगभग 03 करोड़ 25 लाख लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अन्तर्गत 05 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त एवं गारण्टी मुक्त ऋण की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। कारीगरों और हस्तशिल्पियों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास भगवान विश्वकर्मा के प्रति सरकार द्वारा कृतज्ञता ज्ञापित करने का एक माध्यम हैं। सरकार चाहती है कि प्रदेश की समृद्ध शिल्प परम्परा को आधुनिक तकनीक, डिजाइन, वित्त और बाजार से जोड़कर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की शिल्प परम्परा से प्रेरणा लेते हुए प्रदेश के प्रत्येक कारीगर, हस्तशिल्पी और उद्यमी को सम्मान, प्रशिक्षण, तकनीक, पूँजी और बाजार उपलब्ध कराने का अभियान निरन्तर जारी रहेगा। उन्होंने कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों से आह्वान किया कि वे अपनी परम्परागत कला और कौशल को आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनें और प्रदेश के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कारीगरों और हस्तशिल्पियों की मेहनत, कौशल और उद्यमिता के बल पर उत्तर प्रदेश निरन्तर विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।

एम0एस0एम0ई0 मंत्री भूपेन्द्र चौधरी ने भगवान विश्वकर्मा जयन्ती पर प्रदेशवासियों और कारीगरों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि एम0एस0एम0ई0 विभाग ‘श्रमेव जयते’ के मूल मंत्र को अपनाकर उत्तर प्रदेश के श्रम साधकों की सेवा में निरन्तर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने कारीगरों और हस्तशिल्पियों के चौमुखी उत्थान के लिए अनेक योजनाएँ लागू की हैं।

भगवान विश्वकर्मा जयन्ती के अवसर पर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के पारम्परिक कारीगरों, हस्तशिल्पियों और श्रम साधकों को स्वरोजगार से जोड़ने तथा उनके उद्यमों को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओ0डी0ओ0पी0 जैसी कारीगरपरक योजनाओं की देशभर में चर्चा हो रही है। पिछले वर्षों में इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 06 लाख से अधिक हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को लाभान्वित किया गया है। इससे उनकी दक्षता और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उन्हें नए बाजार भी उपलब्ध हुए हैं।

इस अवसर पर सलाहकार मुख्यमंत्री अवनीश कुमार अवस्थी, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव एम0एस0एम0ई0 शशि भूषण लाल सुशील सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, हस्तशिल्पी, कारीगर एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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