महिलाओं को कर्ज नहीं, आमदनी बढ़ाने पर हो जोर- केशव प्रसाद मौर्य
लखपति दीदी बनेंगी प्रदेश की पहचान, 3 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य

लखनऊ: 09 सितम्बर, 2026
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अनुबंधित तकनीकी सहयोगी एजेंसियों, बैंकरों, दुग्ध उत्पादक कंपनियों एवं एच सी एल संस्था के कार्यों की समीक्षा बैठक बुधवार को योजना भवन लखनऊ में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री, केशव प्रसाद मौर्य ने की। बैठक में राज्य मंत्री, ग्राम्य विकास विभाग श्रीमती विजय लक्ष्मी गौतम विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि एक करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रथम किश्त के रूप में 20 हजार रुपये उपलब्ध कराए जाने हैं, जिसका ब्याज विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। इसके बाद दूसरी किश्त के रूप में 30 हजार रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि पात्र महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सरल एवं सुगम बनाई जाए।
बैंकर्स को निर्देशित करते हुए उन्होंने कहा कि वे गरीब महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने में सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाएं और केवल लाभ कमाने की मंशा से कार्य न करें। सरकार द्वारा ब्याज का वहन किया जा रहा है, इसलिए पात्र महिलाओं को योजना का लाभ दिलाने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण को सामान्य रूप से महिला सशक्तिकरण की योजना के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तविक अर्थों में यह गरीब कल्याण की बहुत बड़ी योजना है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 3 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने तथा 1 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल कर्ज उपलब्ध कराना सरकार का उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनकी आमदनी बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना प्राथमिकता है। महिलाओं की आय बढ़ेगी तो परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और गांवों में समृद्धि का आधार तैयार होगा।
उप मुख्यमंत्री द्वारा डेवलपमेंट अल्टरनेटिव संस्था को निर्देशित किया कि मिशन के अधिकारियों के साथ रु. 2.00 लाख तक के अच्छे ई-रिक्शा की पहचान कर, उस तरह के रिक्शे ही समूह की महिलाओं को उपलब्ध कराये जाएं ताकि समूह की दीदियों पर आर्थिक रूप से अधिक बोझ न पड़े और कम लागत में उनको अधिक लाभ हो.
मौर्य ने निर्देश दिए कि तकनीक के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। इसके लिए योजना तैयार की जाए कि प्रत्येक संकुल स्तरीय संघ के पास कम से कम एक ड्रोन उपलब्ध हो। ड्रोन के उपयोग से कृषि एवं अन्य गतिविधियों में नई तकनीक को बढ़ावा देने के साथ-साथ महिलाओं के लिए आय के नए अवसर सृजित किए जाएं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋण उपलब्ध कराते समय बैंकों द्वारा बीमा तो कर दिया जाता है, लेकिन बीमा क्लेम के लिए गरीब परिवारों और आश्रितों को चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह स्थिति उचित नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि बीमा क्लेम के मामलों का सभ्य, संवेदनशील एवं शालीनता के साथ समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि किसी भी गरीब महिला के साथ छल या धोखाधड़ी न हो तथा इस संबंध में अधिकारी लगातार पैनी नजर रखें।
उन्होंने महिलाओं को गाय-भैंस खरीदने के लिए सरल एवं सुगम तरीके से ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन से महिलाएं अपनी आय बढ़ा सकती हैं और इससे प्रदेश में अधिक से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को गति मिलेगी। महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से उनका सम्मान बढ़ेगा तथा परिवार और बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 5 मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन कंपनियों के माध्यम से महिला दुग्ध उत्पादकों को संगठित कर उनकी आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने बैंकर्स एवं अधिकारियों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी एवं जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना और उन्हें समय से लाभ दिलाना सभी संबंधित विभागों एवं संस्थाओं की जिम्मेदारी है। योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे और किसी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
बैठक के प्रारंभ में एचसीएल संस्था द्वारा प्रदेश में किए जा रहे कार्यों एवं उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। संस्था द्वारा स्मार्ट स्कूल, स्वास्थ्य एवं समुदाय आधारित जागरूकता सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। बताया गया कि संस्था अपने अधिकांश सीएसआर फंड का उपयोग उत्तर प्रदेश में कर रही है तथा वर्तमान में 13 जनपदों में कार्यरत है। उपमुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि किसी भी जनपद के संतृप्त होने तक वहां कार्य निरंतर जारी रखा जाए, ताकि संचालित कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लोगों को स्थायी लाभ मिल सके।
बैठक में सभी सहयोगी संस्थाओं ने अपने-अपने कार्यों एवं उपलब्धियों की जानकारी साझा की तथा महिला स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों एवं दुग्ध उत्पादक महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास विभाग सौरभ बाबू, आयुक्त ग्राम्य विकास प्रमोद कुमार उपाध्याय, मिशन निदेशक, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अरुण कुमार, अपर मिशन निदेशक जयनाथ यादव, संयुक्त मिशन निदेशक प्रवीणानन्द व देवेंद्र कुमार ओझा सहित प्रतिभागी बैंकों एवं तकनीकी सहयोगी संस्थाओं के प्रमुख तथा मिशन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।







