UPCM गुरू नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व पर आयोजित प्रकाशोत्सव में सम्मिलित हुए

उत्तर प्रदेश।
#UPCM_NEWS, उत्तर प्रदेश राज्यपाल राम नाईक और UPCM D.A.V. इण्टर काॅलेज में गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर आयोजित प्रकाशोत्सव में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को गुरू नानक देव जी की जयन्ती की बधाई और शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल ने इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरू नानक देव ने सबके साथ बिना किसी भेदभाव के आचरण का संदेश दिया है। उनके संदेश का भाव सिख समुदाय द्वारा लंगर के आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखायी देता है। उन्होंने कहा कि देश पर होने वाले किसी भी हमले का सबसे पहले सामना करने वाला राज्य पंजाब रहा है। इन हमलों का सबसे पहले सामना करके सिख समाज ने देश को बचाने का काम किया है।

UPCM ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा गुरू नानक देव से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को विकसित करने के निर्णय की सराहना की। उन्होंने गुरू नानक देव और सिख परम्परा के इतिहास को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि गुरू नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व को विशिष्ट आयोजन के रूप में मनाया जाना चाहिए। पंजाबी एकेडमी और गुरूद्वारा प्रबन्ध कमेटी द्वारा इस सम्बन्ध में कार्ययोजना बनायी जानी चाहिए। प्रदेश सरकार विशिष्ट आयोजन को पूरा सहयोग प्रदान करेगी।

UPCM ने कहा कि गुरू नानक देव ने धरती पर अवतार लेकर मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। लोक कल्याण के लिए उनके द्वारा अनेक यात्राएं की गईं। अपनी यात्राओं के माध्यम से उन्होंने एशिया, यूरोप के बड़े भू-भाग को कृतार्थ किया। गुरू नानक देव जी ने जन सामान्य को अच्छाई, सत्संग, कीर्तन और भेदभाव रहित जीवन के लिए प्रेरित किया। गुरू नानक देव जी एक निर्भीक महात्मा थे। उन्होंने देशी राजाओं को उनकी निष्क्रियता के लिए धिक्कारा तो विदेशी आक्रान्ता बाबर को जाबर कहने का साहस भी दिखाया।

UPCM ने कहा कि गुरूनानक देव भक्ति की पराकाष्ठा थे। उनकी वाणियों की सच्चाई और लोक कल्याण का भाव आज भी हम सभी का मार्गदर्शन कर रहे हैं तथा सिख परम्परा उससे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सिख परम्परा का इतिहास अत्यन्त गौरवशाली है। इस परम्परा के त्याग और बलिदान की गाथा को विस्मृत नहीं किया जा सकता। खालसा पंथ का शुभारम्भ भेदभाव समाप्त करने के लिए हुआ था। गुरू परम्परा के संस्कारों का ही परिणाम है कि आज भी सिख समाज द्वारा संचालित लंगर में सभी जाति, मत, मजहब के लोगों का स्वागत होता है।

UPCM ने कहा कि आजादी की लड़ाई में भी सिखों का सराहनीय योगदान रहा है। आजाद भारत के विकास में भी इनका उल्लेखनीय योगदान है। पंजाब प्रान्त में कृषि का विकास इसका उदाहरण है। सिख समुदाय अपनी प्रतिभा और पुरुषार्थ और गुरू नानक देव जी के आशीर्वाद से सिख गुरूओं की परम्परा को आगे बढ़ा रहा है।

इस अवसर पर लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया, उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य परमिन्दर सिंह, लखनऊ गुरूद्वारा प्रबन्ध कमेटी के प्रधान राजेन्द्र सिंह बग्गा एवं अन्य सदस्य और जन समुदाय उपस्थित रहा।








