UP_Dy_CM ने कहा बाल साहित्य में क्लिष्ट शब्दों के चयन से बचा जाना चाहिए

उत्तर प्रदेश।
UP_Dy_CM डॉ. दिनेश शर्मा, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के तत्वावधान में बाल दिवस के अवसर पर हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में अभिनन्दन पर्व के आयोजन में शामिल हुए। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा वर्ष 2017 के बाल साहित्य सम्मान से बाल साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि UP_Dy_CM डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि आज प्रत्येक भारतीय भाषा में बाल साहित्य सृजन की बड़ी आवश्यकता है, यह बच्चे ही भारत का भविष्य हैं। इन्हें सुयोग्य नागरिक बनाने के लिए श्रेष्ठ साहित्य के पठन-पाठन की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने इस दिशा में कई योजनाएं चला रखी है।

UP_Dy_CM ने कहा कि जितने भी महान साहित्यकार हुए हैं उन्होंने बाल साहित्य पर जरूर लिखा है। समय के बदलाव के साथ-साथ बाल साहित्य की रचनाओं में भी परिवर्तन की इच्छा की जाने लगी है। आधुनिक परिवेश में डेवेलपमेन्ट प्राॅसेस के तहत साहित्यिक रचनाओं का निर्माण कैसे हो, यह सोचने का विषय है तथा इस दिशा में काम करना होगा। जरूरी है कि आधुनिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए बाल साहित्य की रचना की जाए। बाल साहित्य में क्लिष्ट शब्दों के चयन से बचा जाना चाहिए, जिससे साहित्य की मूल भावना को आसानी से समझा जा सके। आधुनिकता के परिवेश से बाल साहित्य का जुड़ा होना जरूरी है।
अमेरिका में हुए शोध से भी यह स्पष्ट हो चुका है कि बच्चों को दादा-दादी, नाना-नानी की कहानियां सुनाया जाना आज भी जरूरी है, और भारत में सदियों से यह प्रथा प्रचलन में है। कहानियों को सुनने से बच्चों में संस्कार का विकास होता है। बाल साहित्यकारों का हमारी संस्कृति एवं संस्कार को बचाने में अहम योगदान है।
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निदेशक शिशिर के बताया कि सम्मान समारोह में सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य सम्मान से डॉ. शोभा अग्रवाल ‘चिलबिल’ को, सोहनलाल द्विवेदी बाल कविता सम्मान से अनन्त प्रसाद ‘राम भरोसे’ को, अमृतलाल नागर बाल कथा सम्मान से दिनेश प्रताप सिंह ‘चित्रेश’ को, शिक्षार्थी बाल चित्रकथा सम्मान से किशोर श्रीवास्तव को, डॉ. राम कुमार वर्मा बाल नाटक सम्मान से अंजू शर्मा को, जगपति चतुर्वेदी बाल विज्ञान लेखन सम्मान से डॉ. अरविन्द दुबे को एवं उमाकान्त मालवीय युवा बाल साहित्य सम्मान से शिवमोहन यादव को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर बाल साहित्यकारों को उत्तरीय, प्रशस्ति पत्र एवं 51 हजार रुपये की धनराशि भेंट कर सम्मानित किया गया।





