मनरेगा श्रमिकों को आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम से समय से किया जाय भुगतान: केशव मौर्य

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को  निर्देश दिए हैं कि मनरेगा श्रमिकों को आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम से  पारिश्रमिक का भुगतान समय से किया जाय।श्रमिकों के पारिश्रमिक भुगतान में लापरवाही  या हीलाहवाली किसी भी दशा में  क्षम्य नहीं होगी।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि मनरेगा श्रमिकों के भुगतान संबंधी कार्यों में उदासीनता या लापरवाही  करने वाले  अधिकारियों के विरुद्ध  सख्त कार्यवाही की जाय। कहा है कि मनरेगा में जब भी कोई जाब कार्ड धारक काम की मांग करें तो उन्हें तत्काल काम दिया जाय और काम  के बदले उसके पारिश्रमिक का भुगतान विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय से  किया जाए।

मनरेगा श्रमिकों को आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम  के कार्यों में उदासीनता पाये जाने पर ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी द्वारा 03 जनपदों के  उपायुक्तों (श्रम रोजगार) को कारण बताओं नोटिस जारी किया है। मनरेगा योजना के अंतर्गत सभी श्रमिकों को शत-प्रतिशत ।ठच्ै म्दंइसमक कराने के कार्य में लापरवाही करना इन अधिकारियों को भारी पड़ गया। 80 फीसदी से कम प्रगति वाले जनपदों-गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, और शामली के उपायुक्तों (श्रम रोजगार) को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

गौरतलब है कि जॉब कार्ड धारक मनरेगा श्रमिक आधार से लिंक हो जाने से आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम से भुगतान होता है और धनराशि सीधे उनके खाते में पहुंचती है। भुगतान में पादर्शिता रहे, इस उद्देश्य से श्रमिकों के जॉब कार्ड को उनके आधार से लिंक करने का काम किया जा रहा है। प्रत्येक दशा में 31 दिसंबर 2023 तक सभी मनरेगा श्रमिकों को शत-प्रतिशत ।ठच्ै म्दंइसमक कराया जाना है।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा विषय की संवेदनशीलता  व गम्भीरता को देखते हुए लगातार  इसकी समीक्षा  की गयी और अधिकारियों का मार्गदर्शन किया जाता रहा, परिणामस्वरूप पिछले 3 महीने में इस  सम्बन्ध में  बहुत ही उत्कृष्ट व उल्लेखनीय प्रगति  हुयी है और बीते 3 महीने  में ।ठच्ै म्दंइसमक कराने के कार्य में प्रदेश की औसत प्रगति 74 फीसदी से बढ़कर 91 फीसदी पहुंच गई है। माह सितंबर में प्रदेश का औसत प्रगति 74 फीसदी थी जो अब 91 फीसदी पर पहुंच गई है। विभाग द्वारा भी  जिलों को  पत्राचार, दूरभाष एवं साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से  लगातार दिशा निर्देश जा रहे हैं।

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