मुख्यमंत्री: BRD मेडिकल कॉलेज ग्रीन एवं क्लीन एनर्जी का वाहक बन रहा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आज बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह मेडिकल कॉलेज ग्रीन एवं क्लीन एनर्जी का वाहक बन रहा है। इसके साथ ही कॉलेज में बढ़ीं 50 एम0बी0बी0एस0 सीटों के लिए नए प्रशासनिक भवन के शिलान्यास का कार्यक्रम संपन्न हो रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेज को और अधिक सशक्त बनाने के लिए यहां बढ़ी हुई 50 एम0बी0बी0एस0 की सीटों हेतु प्रशासनिक भवन के लिए 60 करोड़ रुपए धनराशि की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने जनपद गोरखपुर में बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज में सोलर रुफटाॅप प्लाण्ट का लोकार्पण तथा एम0बी0बी0एस0 छात्रों के लिए जी प्लस-5 प्रशासनिक भवन का शिलान्यास करने के पश्चात, इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किये। उन्होेंने चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज को ग्रीन एवं क्लीन एनर्जी तथा इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। इस मेडिकल काॅलेज ने अनेक उतार चढ़ाव देखे हैं, हमने वह भी दौर देखा है, जब यह मेडिकल काॅलेज पूर्वी उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य का एक मात्र केन्द्र हुआ करता था। कोई भी अन्य संेटर नहीं था, और यह मेडिकल काॅलेज संसाधनो के अभाव से जूझ रहा था। वर्ष 1997 में बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज की मान्यता के ऊपर संकट आया था, एम0सी0आई0 ने वर्ष 1998-99 में इसकी मान्यता विथड्रा कर दी थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने एम0सी0आई को आश्वस्त किया कि हम यहां की आवश्यकताओं को पूरा करेंगे, इसके लिए प्रयास किया गया था, क्योंकि बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की बैकबोन है। इसे बंद कर देंगे तो सब कुछ बंद हो जायेगा। इंसेफ्लाइटिस से होने वाली हजारों मौतों को नियंत्रित कर पाना कठिन हो जायेगा। आज जब हम  बी0आर0डी0 मेडिकल काॅलेज में आते हैं, तो देखते हैं कि सुविधाओं से युक्त इस मेडिकल काॅलेज में जो भी मरीज आता है तो उसका पूरा ब्यौरा होता है, उसकी केस हिस्ट्री होने के नाते मरीज का उपचार करने में मदद मिलती है।

आज इस मेडिकल कॉलेज में अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है। इस मेडिकल कॉलेज में बाल रोग संस्थान भी प्रारम्भ हो चुका है। यहां रीजनल वायरल रिसर्च सेंटर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। सुपर स्पेशलयटी ब्लॉक बन चुका है। पीडियाट्रिक वाॅर्ड अनेक प्रकार की सुविधाओं से युक्त है। प्रदेश में सी0एच0सी0 स्तर पर मिनी बाल सघन चिकित्सा इकाइयों की स्थापना हो चुकी है। प्रत्येक जिला चिकित्सालय में पीकू वाॅर्डों की स्थापना हो चुकी है। प्रत्येक स्तर पर आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्र्रियों, जनपदों में तैनात पीडियाट्रीशियन व फिजीशियन को ट्रेनिंग प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज काफी आगे बढ़ चुका है। जैसे एस0जी0पी0जी0आई0 और एम्स दिल्ली का पैरेलल काम्पटिशन चलता है, वैसे ही बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज को गोरखपुर एम्स के साथ स्वस्थ प्रतियोगिता करनी है। इसके लिए स्वयं को तैयार करना होगा। इस समय दोनों संस्थाओं की गुणवत्ता समानान्तर चल रही है। बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज के लिए यह कार्य इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां की पुरानी फैकल्टी के पास लम्बा अनुभव है। इससे ज्ञान का आदान-प्रदान कर बेस्ट प्रैक्टिसेज से एक दूसरे को जोड़ सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज ऐसे स्थान पर बना हुआ है जहां पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपद कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज, गोरखपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थ नगर तथा मऊ से रोगी आते हैं। साथ ही, बिहार के 8-10 जनपदों तथा पड़ोसी देश नेपाल के तराई क्षेत्र से बड़ी संख्या में रोगी भी यहां उपचार के लिए आते हैं।

मुख्यमंत्री  ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहली बार इंसेफेलाइटिस बीमारी वर्ष 1977-78 में आई थी। इंसेफेलाइटिस से प्रतिवर्ष 1200 से 1500 बच्चों की मौतें होती थीं। विगत 6-7 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को नोडल विभाग बनाकर इंसेफेलाइटिस को समाप्त करने का अभियान आगे बढ़ाया। परिणामस्वरूप इंसेफेलाइटिस को पूरी तरह नियंत्रित किया चुका है, केवल उसके समाप्त होने की घोषणा बाकी है। यह स्वयं में मॉडल है। इस सफलतम अभियान का केंद्र बिंदु बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज बना था।

इस अभियान में लगी जनशक्ति तथा संसाधन का उपयोग स्वास्थ्य की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। प्रदेश सरकार लगातार इस दिशा में प्रयास कर रही है। इंसेफेलाइटिस उन्मूलन के अभियान के क्रम में वर्ष 2017 में पहली बार जनपद कुशीनगर में स्वच्छता एवं स्वच्छ पेयजल के विषय में जागरूकता के एक बड़े अभियान को चलाया गया था। यहां मुसहर जनजाति के लोगों को निःशुल्क साबुन वितरित किए गए। स्वच्छता पर ध्यान देने से बहुत सारी बीमारियों का समाधान स्वयं हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने मेडिकल काॅलेज के भावी चिकित्सकों से अपील करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों एवं वर्क लोड में बिना धैर्य खोए कार्य करना है। उन्होंने कहा कि वह बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज आने से पूर्व 500 लोगों की समस्याओं का समाधान करके आए हैं। किसी समस्या को लेकर आने वाले व्यक्तियों की बातों को  धैर्यपूर्वक तथा संवेदनशीलता से सुनना चाहिए क्योंकि हमें इसके लिए चुना गया है। इन बातों का ध्यान रखकर अच्छा चिकित्सक बना जा सकता है। रोग को पहचानने एवं उसकी पृष्ठभूमि में जाने के बाद उसके सफलतम उपचार की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

वर्तमान समय नवाचार, अनुसंधान एवं विकास का है। नवाचार एवं अनुसंधान केंद्र लोगों को नई राह दिखाने के लिए कार्य करते हुए दिखाई देने चाहिए। जब आप फील्ड में जाएंगे तो वहां की भौगोलिक, सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति भी देखने को मिलेगी। यदि इन परिस्थितियों को नोट कर केस स्टडी तैयार करेंगे तो मेडिकल क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला पाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम क्लीन एवं ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में एक नए मॉडल के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह प्रधानमंत्री के वर्ष 2070 तक पूर्ण रूप से क्लीन एवं ग्रीन एनर्जी अपनाने के विजन को प्रदर्शित करता है। वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग इसके लिए बहुत बड़ा माध्यम है। हम वर्ष भर में लगभग 10 महीने अच्छी सोलर एनर्जी को प्राप्त करते हैं। इसका उपयोग किया जाना चाहिए। छतों, नालियों के उपर, बाउंड्री वॉल आदि पर सोलर पैनल लगाया जा सकता है। वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि शहरी क्षेत्र में  विभिन्न रंगों की स्ट्रीट लाइटें लगी होती हैं। हैलोजन लाइट बहुत अधिक मात्रा में बिजली की खपत तथा कार्बन उत्सर्जन करती है। एक हैलोजन लाइट जितनी विद्युत की खपत करती है, उतनी विद्युत में 10-15 स्थानों पर एल0ई0डी0 लाइटें लगाई जा सकती हैं। इससे बेहतरीन प्रकाश प्राप्त होने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी तथा ग्रीन हाउस प्रभाव को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त होगी।

उस समय हैलोजन के स्थान पर निःशुल्क एल0ई0डी0 स्ट्रीट लाइटें लगाने तथा मेंटेनेंस करने व इसके परिणामस्वरुप बची हुई बिजली से प्रतिपूर्ति करने के लिए भारत सरकार के प्रतिष्ठान ई0ई0एस0एल0 से अनुबंध किया गया। प्रदेश में लगभग 16 लाख स्ट्रीट लाइटें बदली गईं। आज प्रदेश के प्रत्येक कस्बे में जगमगाती हुई एक जैसी दूधिया स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नेट बिलिंग की व्यवस्था की है। प्रदेश में इसके लिए नीति लागू की जा चुकी है। इसके अंतर्गत व्यक्ति जितनी बिजली खर्च करेगा उसके घर में लगे रूफटॉप सोलर पैनल से उतनी बिजली ले ली जाएगी। यदि वह अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराएगा, तो उसका अतिरिक्त पैसा प्रदान किया जाएगा। वाणिज्यिक संस्थाओं को नेट मीटरिंग के साथ जोड़ते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया है। बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज में रूफटॉप सोलर पैनल से बिना पैसा खर्च किए 01 मेगावाट बिजली उत्पन्न होगी। इससे 72 लाख रुपये वार्षिक बचत भी होगी। इसका उपयोग मेडिकल कॉलेज के अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है। खाली पड़ी छत का उपयोग हो गया साथ-साथ क्लीन एवं ग्रीन एनर्जी भी प्राप्त हो गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नये भारत का नया उत्तर प्रदेश है। आगामी 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर-कमलों द्वारा ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से प्रदेश में देश का सबसे बड़ा निवेश होने जा रहा है। पहली किसी राज्य में 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश का एक दिन में, एक साथ शिलान्यास किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक संस्थान को अपनी-अपनी जिम्मेदारी को लेकर आगे बढ़ना होगा। यदि हम इस दिशा में प्रयास करेंगे, तो इसके बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।

इस अवसर पर निदेशक यू0पी0 नेडा अनुपम शुक्ला ने कार्यक्रम की रूप रेखा प्रस्तुत की तथा ओ0एम0सी0 पावर के प्रबन्ध निदेशक रोहित चन्द्रा ने रूफटाॅप सोलर पैनल की विशेषताओं के बारे में अवगत कराया।

कार्यक्रम में प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य एवं ऊर्जा के क्षेत्र में किया जा रहे हैं प्रयासों पर एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर सांसद रवि किशन शुक्ल तथा कमलेश पासवान सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पार्थ सारथी सेन शर्मा एवं शासन-प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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